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ⓘ शशांक कुमार द्विवेदी. परिचय अंगूठाकार|Shashank Dwivedi शशांक कुमार द्विवेदी, वर्तमान में मेवाड़ विश्वविद्यालय, चितौड़गढ में उपनिदेशक के पद पर कार्यरत हैं। साथ ह ..


                                     

ⓘ शशांक कुमार द्विवेदी

परिचय अंगूठाकार|Shashank Dwivedi शशांक कुमार द्विवेदी, वर्तमान में मेवाड़ विश्वविद्यालय, चितौड़गढ में उपनिदेशक के पद पर कार्यरत हैं। साथ ही प्रतिष्ठित पत्रिका टेक्निकल टूडे के संपादक और यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त मल्टी डिसिप्लिनरी जर्नल, जर्नल आँफ इंडियन रीसर्च के सह संपादक हैं, विज्ञान और तकनीक पर केन्द्रित विज्ञानपीडिया डॉट कॉम के संचालक भी है। पिछले 15 सालों से विज्ञान संचारक और स्तंभकार के रूप में देश के लगभग सभी प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों मसलन नवभारतटाइम्स, हिंदुस्तान, दैनिक जागरण, लोकमत समाचार, जनसत्ता, दैनिक भास्कर, अमर उजाला, नई दुनियाँ, राष्ट्रीय सहारा, राजस्थान पत्रिका, जनसंदेश टाइम्स, डीएनए, नेशनल दुनियाँ, ट्रिब्यून, डेली न्यूज, अजीत समाचार, दैनिक आज, हरिभूमि, राज एक्सप्रेस, जनवाणी, पीपुल्स समाचार,पायनियर, अजीत समाचार, हिमाचल दस्तक, प्रभात खबर आदि अख़बारों में नियमित रूप से स्वतंत्र लेखन। लेखों के मुख्य विषय शिक्षा, विज्ञान और तकनीक हैं। प्रिंट मीडिया में विज्ञान और तकनीकी विषय पर लिखने वाले देश के प्रमुख और वरिष्ठ लेखक के रूप में पहचान. अखबारी लेखन के माध्यम से आम आदमी को विज्ञान और तकनीक से जोड़ने का सार्थक प्रयास. सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार की प्रमुख पत्रिका योजना, कुरुक्षेत्र में भी लेख प्रकाशित. देश की अन्य प्रमुख पत्रिकाओं विज्ञान प्रगति, टेक्नीकल टूडे, दस्तक टाइम्स, प्रतियोगिता दर्पण, इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए, विज्ञान आपके लिए, महामीडिया, आविष्कार आदि में भी विज्ञान संचारक के रूप में लेख प्रकाशित.

1 सितंबर 1981 को उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिलें में जन्में शशांक ने औपचारिक शिक्षा के तौपर यूपी टेक्नीकल यूनिवर्सिटी लखनऊ से बी.टेक इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन और राजस्थान टेक्नीकल यूनिवर्सिटी से एम.टेक डिजिटल कम्युनिकेशन किया हैं। इंजीनियरिंग की पढाई करते समय ही देश के प्रमुख हिन्दी अखबार अमर उजाला के लिए नवीनतम तकनीक और प्रौद्योगिकी से सम्बंधित कॉलम" साइबर बाइट्स" से तकनीकी लेखन की विधिवत शुरुवात की थी। मथुरा के हिंदुस्तान कालेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलोजी में बीटेक की पढाई के दौरान ही विज्ञान संचारक के रूप में देश के कई प्रमुख अखबारों में स्तंभ लिखने की शुरुवात की थी।

14 सितंबर 2014 को हिन्दी दिवस पर शशांक को नई दिल्ली में देश के प्रसिद्ध टीवी चैनल एबीपी न्यूज के एक खास कार्यक्रम में विज्ञान और तकनीकी लेखन के लिए सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर का पुरस्कार दिया गया। यह पुरस्कार उनके प्रसिद्ध ब्लॉग/वेबसाइट विज्ञानपीडिया डॉट कॉम के लिए दिया गया। विज्ञानपीडिया डॉट कॉम विज्ञान और तकनीक की दुनियाँ आम आदमी, छात्रों और प्रोफेशनल्स को हिंदी में विज्ञान और तकनीक से सम्बंधित नवीनतम जानकारी, खोज, लेख उपलब्ध कराती है। आम आदमी और छात्रों की विज्ञान में रूचि बढानें के उद्देश्य से विज्ञानपीडिया की शुरुवात की गई थी जो काफी सफल रही। हिंदी में विज्ञान और तकनीक से सम्बंधित गुणवत्तापूर्ण कंटेंट की काफी कमी है। जबकि ग्रामीण इलाकों के बच्चों को उनकी भाषा में ही विज्ञान से संबधित सामग्री देकर उनकी रूचि बढ़ाई जा सकती है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए ही विज्ञानपीडिया डॉट कॉम जैसा प्रयोग किया गया, जिसको आशातीत सफलता मिल रही है। इस वेबसाइट का उद्देश्य आम आदमी को विज्ञान और तकनीक से जोड़ना है। इस वेबसाइट पर विज्ञान और तकनीक से संबंधित अच्छी से अच्छी जानकारी उपलब्ध है।

दुनियाँ के कई देशों से इस वेबसाइट को देखा और सराहा जा रहा है और इसकी सामग्री पर हजारों हिट्स मिल रहें है, विश्व स्तर पर अब तक वेबसाईट के 251143 पेज देखें जा चुके है। विज्ञानपीडिया अपनी विशिष्ट सामग्री की वजह से युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसमें अंतरिक्ष, उर्जा संकट, जल संकट, ग्लोबल वार्मिग, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, मंगल अभियान पर कई विशेष लेख है।

विज्ञान संचार से जुडी देश की कई संस्थाओं द्वारा उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। 28 फरवरी 2012 को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विज्ञान भवन, नई दिल्ली में उन्हें विज्ञान प्रसार विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। शशांक को 30 अगस्त 2016 को देहरादून में दून यूनिवर्सिटी में वाईएस रिसर्च फाउंडेशन ऑफ़ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन संस्था की तरफ से "वाईएस रिसर्च एक्सीलेंस अवार्ड" 2016 से सम्मानित किया गया। शशांक वर्तमान में इंडियन साइंस कांग्रेस एशोसियेशन के आजीवन सदस्य है साथ ही अखिल भारतीय स्वतंत्र लेखक मंच, नई दिल्ली के सदस्य भी हैं। देश की प्रमुख संस्थाओं नें शशांक को अतिथि वक्ता के रूप में अपना वक्तव्य देनें के लिए आमंत्रित भी किया है।

आम आदमी को विज्ञान से जोड़ना ही उद्देश्य: शशांक का मुख्य उद्देश्य आम आदमी को विज्ञान और तकनीक से जोड़ना है। हिंदी में विज्ञान और तकनीक से सम्बंधित गुणवत्तापूर्ण सामग्री की काफी कमी है। जबकि ग्रामीण इलाकों के बच्चों को उनकी भाषा में ही विज्ञान से संबंधित सामग्री देकर उनकी रूचि बढ़ाई जा सकती है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए पिछले 15 सालों से शशांक विज्ञान संचारक के रूप में अखबारों, पत्रिकाओं और अपनी वेबसाइट विज्ञानपीडिया डॉट कॉमwww.vigyanpedia.com के माध्यम से आम आदमी, छात्रों और प्रोफेशनल्स को हिंदी में विज्ञान और तकनीक से सम्बंधित नवीनतम जानकारी, खोज, लेख उपलब्ध करा रहें हैं। आम आदमी और छात्रों की विज्ञान में रूचि बढानें के उद्देश्य से विज्ञानपीडिया की शुरुवात की गई थी जो काफी सफल रही है। साथ ही नियमित अखबारी लेखन के माध्यम से आम आदमी को विज्ञान और तकनीक से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया जा रहा है।

वैज्ञानिक जागरूकता और जन सशक्तीकरण के लिहाज से हिंदी में विज्ञान संचार की महत्वपूर्ण भूमिका है। विज्ञान संचार का उद्देश्य लोगों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों और खोजों की समग्र जानकारी प्रदान करना है। ऐसे में शशांक द्वारा पिछले 15 सालों से अनवरत विज्ञान लेखन से मीडिया में विज्ञान संचार के लिए काफी जगह बनी है। पहले हिंदी मीडिया या हिंदी अख़बारों में विज्ञान से संबधित खबरों या लेखों को उतनी जगह नहीं मिल पाती थी,सिर्फ विज्ञान जगत की सनसनीखेज ख़बरें ही हिंदी अख़बारों में जगह बना पाती थी लेकिन शशांक ने अपने धारदाऔर सामयिक लेखन की वजह से हिंदी मीडिया के अख़बारों और पत्रिकाओं में बड़ी जगह बनाई है। पिछले पंद्रह सालों में शशांक के हजारों लेख देश के प्रमुख अख़बारों और पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं और अब भी लगातार प्रकाशित हो रहें है। आम आदमी को विज्ञान से जोड़ने के लिए ये एक बड़ा महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी प्रयास है।

विज्ञान संचार देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में अनेक वैज्ञानिक, विज्ञान संबंधी खोजें, पद्धतियां, पारंपरिक ज्ञान और नवाचार के प्रयोग मीडिया में जगह न मिलने के कारण अज्ञात रह जाते हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों से आविष्कारों में लगे लोग देश और समाज के सामनें नहीं आ पातें है। ऐसे में क्षेत्रीय भाषा में ख़ासकर हिंदी में विज्ञान संचार की बड़ी भूमिका है क्योंकि ज्यादातर विज्ञान की सामग्री अंग्रेजी में होने की वजह से करोड़ों हिन्दी भाषी लोग विज्ञान और तकनीक से नहीं जुड़ पातें है। रोजमर्रा की जिंदगी में विज्ञान और तकनीकी विषयों से संबंधित जानकारी लोगों की निर्णय क्षमता के विकास में भी मददगार हो सकती है। देश में लोकप्रिय विज्ञान लेखन में कुछ प्रगति अवश्य हुई है, लेकिन ऐसा विज्ञान लेखन, जिसमें गुणवत्ता हो और जो जन साधारण की समझ में भी आ सके, कम लिखा गया है। इंटरनेट पर आज हिंदी में विज्ञान सामग्री अति सीमित है। विश्वविद्यालयों तथा राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थानों में कार्यरत अधिकांश विषय विशेषज्ञ अपने आलेख, शोधपत्और किताबें अंग्रेजी में लिखते हैं। हिंदी अथवा अन्य भारतीय भाषाओं के विज्ञान लेखन में वे कोई रुचि नहीं लेते। संभवत: भाषागत कठिनाई और वैज्ञानिक समाज की घोर उपेक्षा उन्हें इस दिशा में आगे नहीं आने देती। ऐसे में विज्ञान संचार के माध्यम से आम आदमी को विज्ञान और तकनीक से जोड़ना शशांक का अंतिम लक्ष्य है जिसमें वो काफी हद तक सफल भी रहें है।

                                     
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