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ⓘ मानवता, सद्गुण. मानवता ही नैतिकता का आधार है।सभी नैतिक मूल्य सत्य अहिंसा प्रेम सेवा शांति का मूल मानवता ही है। मनुष्य को चाहिए कि मानवता के मार्ग पर चलता हुआ सत ..

मानवता (सद्गुण)
                                     

ⓘ मानवता (सद्गुण)

मानवता ही नैतिकता का आधार है।सभी नैतिक मूल्य सत्य अहिंसा प्रेम सेवा शांति का मूल मानवता ही है। मनुष्य को चाहिए कि मानवता के मार्ग पर चलता हुआ सत्कर्म करे ।मानव कल्याण के लिए जिये और मरे तभी किसी भी मानव का जीवन सार्थक हो सकता है।

मानव मूल्यों के साथ जीवन जीना ही मानवता है।सेवा करो।त्याग करो।धर्म करो।दया करो।प्रेम करो।अहिंसा में जियो।यही तो मानवता है।

छल कपाट द्वेष अपराध करना अनैतिक है इससे समाज मे अपराध का जन्म होता है।अपराध मुक्त समाज और समाज मे सुख शांति लाने के लिए समाज को नैतिक होना होगा ।

विश्व मे सुख और शांति लेन का एकमात्र मार्ग मानवता है।इसलिये सभी मानव के मानवता का मार्ग अपनाना चाहिए।किसी को कास्ट न देना सबके कल्याण की चाहत करना और दुख दूर करने का यथासंभव प्रयास करना ही मानवता को स्थापित कर सकता है।

आदिकाल में ऋषि मुनियों ने प्राचीन ग्रन्थ के मध्यम से संदेश दिया ।

वसुधैव कुटुम्बकम अर्थार्त विश्व एक परिवार है।और यह परिवार मानवता द्वारा ही पूर्ण होगा।

इस धरती पर राम,कृष्ण,बुध,महावीर,प्रभु ईशा,पैगम्बर,नानक आये उन्होंने भी मानवता का पाठ पढ़ाया।

सभी महापुरुषो ने मानवता का पाठ पढ़ाया है।

                                     
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