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ⓘ भारतवर्ष संज्ञा पुं० पुराणानुसार जंबू द्वीप के अंतर्गत नौ वर्षों या खंडों में से एक जो हिमालय के दक्षिण ओर गंगोत्तरी से लेकर कन्याकुमारी तक और सिंधु नदी से ब्रह ..

                                     

ⓘ भारतवर्ष

भारतवर्ष संज्ञा पुं० पुराणानुसार जंबू द्वीप के अंतर्गत नौ वर्षों या खंडों में से एक जो हिमालय के दक्षिण ओर गंगोत्तरी से लेकर कन्याकुमारी तक और सिंधु नदी से ब्रह्मपुत्र तक फैला हुआ है ।

                                     

1. भगवान ऋषभदेव के पुत्र

नाभिराज के पुत्र भगवान ऋषभदेव के पुत्र भरत चक्रवर्ती |

पुरातात्विक उल्लेख-

हाथीगुम्फा शिलालेख- भारतवर्ष शब्द का एक भौगोलिक ईकाई के रूप में सबसे पुराना उपयोग हाथीगुम्फा शिलालेख में मिलता है। यह 2nd century BCE-1st century CE के मध्य जैन धर्म के अनुयायी कलिंगराज खारवेल द्वारा उत्कीर्ण कराया गया था। इसमे उल्लेख है की राजा नन्द, कलिंग से इस युग के प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की मूर्ति जोकि कलिंगजिन नाम से प्रसिद्ध थी जो मूर्ति वह पाटलिपुत्र ले गया था, उसे सम्राट खारवेल फिर से कलिंग वापस ले आये |

                                     

2. राजा दुष्यंत- शकुंतला के पुत्र-

साहित्यिक उल्लेख-

  • विभिन्न लोग श्रीमद् भागवत पुराण उल्लेख होने कि बात कहते हैं किंतु नौवें स्कंध, अध्याय २० में जहां दुष्यंत- शकुंतला के पुत्र भरत के चरित्र का वर्णन किया गया है इस संबंध में कोई उल्लेख नहीं है साथ ही इस पुराण के स्कन्ध ५ अध्याय ४ श्लोक ९ स्पष्ट रुप से उल्लेेेख है कि ऋषभ देव के पुत्र भरत के नाम पर ईस क्षेत्र का नाम भारतवर्ष पड़ा |
  • महाभारत में इस सम्बन्ध मे कोई उल्लेख नही है केवल अनुशासन पर्व अध्याय ७६ श्लोक २६ में उल्लेख आया है - चक्रवर्ती भरत- जिनके वंश में होने वाले सभी राजा भारत कहलाये एवम् आदि पर्व अध्याय ६९ श्लोक ४९ में उल्लेख आया है- भरताभारती कीर्तिर्येनेदं भारतं कुलम | अपरे ये च पूर्वे च भारता इति विश्रुता: || अर्थात् इसी भरत से यह भरतवंश प्रसिद्ध हुआ, जो आगे चलकर भारत के नाम से प्रसिद्ध हुये, भरत से पूर्व और बाद मे जितने भी मनुष्य उत्पन्न हुए वे सब भारत के नाम से प्रसिद्ध हुए |
  • कालिदास की अभिज्ञान शाकुंतलम में इस सम्बन्ध मे कोई उल्लेख नही है ।

शब्दकोश

अनुवाद