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ⓘ विदेशी मुद्रा का आरक्षित भंडार. साँचा:Foreign Exchange विदेशी मुद्रा का आरक्षित भंडार आरक्षित निधियों का भंडार भी कहा जाता है दरअसल सही मायने में वे केवल विदेशी ..


                                     

ⓘ विदेशी मुद्रा का आरक्षित भंडार

साँचा:Foreign Exchange विदेशी मुद्रा का आरक्षित भंडार आरक्षित निधियों का भंडार भी कहा जाता है) दरअसल सही मायने में वे केवल विदेशी मुद्रा जमा राशि और केंद्रीय बैंक तथा मौद्रिक अधिकारियों के पास सुरक्षित बांड हैं। हालांकि, लोकप्रिय व्यवहार में आमतौपर इस शब्द में साधारणतया विदेशी मुद्रा और सोना, एसडीआर एवं आईएमएफ की आरक्षित भण्डार की अवस्थितियां शामिल हैं। यह व्यापक आंकड़ा आसानी से उपलब्ध तो है, लेकिन और भी अधिक सही अर्थों में इसे आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय आरक्षित निधियां या अंतरराष्ट्रीय आरक्षित निधियां माना गया है। ये केंद्रीय बैंक के कब्जे में सुरक्षित परिसंपत्तियां हैं जो विभिन्न मुद्राओं में आरक्षित है, ज्यादातर अमेरिकी डॉलर में और कुछ कम हद तक यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन,चीन युआन में अपनी देयताओं के पृष्ठपोषण में व्यवहृत होते हैं, उदाहरण के लिए जो स्थानीय मुद्रा जारी की गयी है और सरकार या वित्तीय संस्थानों द्वारा केंद्रीय बैंक के पास जमा जो विभिन्न बैंक की आरक्षित निधियां हैं।

परिभाषा ‘विशेष आहरण अधिकार – एसडीआर’ सदस्य देशों के मौजूदा भंडार के लिए एक पूरक के रूप में संचालित है, जो 1969 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष आईएमएफ द्वारा बनागई मौद्रिक आरक्षित मुद्रा के एक अंतरराष्ट्रीय प्रकार,। अंतरराष्ट्रीय खातों को निपटाने का एकमात्र साधन के रूप में सोने की सीमाओं और डॉलर के बारे में चिंताओं के जवाब में बनाया, एसडीआर मानक आरक्षित मुद्राओं सप्लीमेंट द्वारा अंतरराष्ट्रीय तरलता बढ़ाने के लिए तैयाकर रहे हैं। परिभाषा ‘विशेष आहरण अधिकार – एसडीआर’ सदस्य देशों के मौजूदा भंडार के लिए एक पूरक के रूप में संचालित है, जो 1969 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष आईएमएफ द्वारा बनागई मौद्रिक आरक्षित मुद्रा के एक अंतरराष्ट्रीय प्रकार,। अंतरराष्ट्रीय खातों को निपटाने का एकमात्र साधन के रूप में सोने की सीमाओं और डॉलर के बारे में चिंताओं के जवाब में बनाया, एसडीआर मानक आरक्षित मुद्राओं सप्लीमेंट द्वारा अंतरराष्ट्रीय तरलता बढ़ाने के लिए तैयाकर रहे हैं।

                                     

1. इतिहास

आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय आरक्षित निधियां, जो आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय भुगतान का माध्यम है, पिछले दिनों केवल सोने के रूप में ही शामिल थीं और कभी कभी ही चांदी के रूप में हुआ करती थीं। लेकिन ब्रेटन वुड्स प्रणाली के अंतर्गत अमेरिकी डॉलर एक आरक्षित मुद्रा भंडार के रूप में कार्यरत है, अतः यह भी राष्ट्र की अधिकारिक अंतरराष्ट्रीय आरक्षित परिसंपत्तियों का एक हिस्सा हुआ। 1944 से 1968 तक, फेडरल रिजर्व सिस्टम के माध्यम से अमेरिकी डॉलर सोने में परिवर्तनीय था, लेकिन 1968 के बाद ही केंद्रीय बैंक डॉलर को सरकारी सोने के आरक्षित भंडार में कन्वर्ट कर सका और 1973 के बाद कोई व्यक्ति या संस्था आरक्षित सरकारी सोने के भण्डार से अमरीकी डॉलर को सोने में परिवर्तित नहीं कर सका। 1973 के बाद से, प्रमुख मुद्राए सरकारी सोने के आरक्षित भंडार से अबतक सोने में परिवर्तनीय नहीं हो पाई हैं। व्यक्तियों और संस्थाओं को अब अन्य वस्तुओं की तरह सोना भी निजी बाजारों में ही खरीदना चाहिए। हालांकि अमरीकी डालर और अन्य मुद्राएं अब सरकारी सोने के आरक्षित भंडार से सोने में परिवर्तनीय नहीं रह गईं हैं, फिर भी वे अभी भी आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय आरक्षित भंडार के रूप में कार्य कर सकती हैं।

                                     

2. प्रयोजन

एक लचीला विनिमय दर प्रणाली में सरकारी अंतरराष्ट्रीय आरक्षित परिसंपत्तियां केंद्रीय बैंक को घरेलू मुद्रा खरीदने की अनुमति प्रदान करती हैं, जो केंद्रीय बैंक के लिए एक देयता माना जाता है चूंकि यह मुद्रा या आईओयूस IOUs के रूप में वैध मुद्रा व्यवस्थापत्र का मुद्रण प्रिंट करता है। यह क्रिया घरेलू मुद्रा के मूल्य को स्थिरता प्रदान कर सकती हैं।

विनिमय दर को प्रभावित करने के प्रयास में दुनिया भर में केंद्रीय बैंकों ने कभी कभी अंतरराष्ट्रीय आरक्षित निधियों की खरीद और बिक्री में सहयोग प्रदान किया है।

                                     

2.1. प्रयोजन आरक्षित निधियों में परिवर्तन

जैसे ही केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति लागू करता है विदेशी मुद्रा की आरक्षित निधियों की मात्रा तदनुसार बदल सकती है। केंद्रीय बैंक जो एक नियत विनिमय दर नीति लागू करता उसे एक ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है जहाँ मांग और आपूर्ति मुद्रा की कम या उच्च मूल्य निर्धारण की ओर प्रवृत्त कर सकता है मांग में वृद्धि मुद्रा के लिए इसकी कीमत में वृद्धि की ओर प्रवृत्त करती है और मांग में कमी मुद्रा के मूल्य में कमी लाती है. एक लचीले विनिमय दर के दौर में, ये कार्य-प्रणालियां केंद्रीय बैंक के समाशोधन के साथ विदेशी मुद्रा की खरीद या बिक्री के द्वारा किसी भी अतिरिक्त मांग या आपूर्ति के साथ स्वतः परिचालित होती हैं। मिश्रित विनिमय दर के दौर में गंदे निर्गम dirty floats, बैंड सीमा-मात्रा या इसी तरह के बदलाव को अपना लक्ष्य बनाते हैं) गैर-वंध्यीकृत या विदेशी मुद्रा विनिमय आपरेशन के प्रयोग की आवश्यकता हो सकती है अवरुद्ध स्टरिलाइजड या अनस्टरिलाइजड अनवरुद्ध) निर्धारित समय-सीमा के भीतर लक्षित विनिमय दर बनाए रखने के लिए.

विदेशी मुद्रा आपरेशन जो कि अनवरुद्ध अनस्टरिलाइजड हैं वे संचलन में घरेलू मुद्रा की मात्रा में विस्तार या संकुचन के कारण बनेंगे और इसलिए मौद्रिक नीति और मुद्रास्फीति को सीधे प्रभावित करते हैं: एक विनिमय दर का लक्ष्य मुद्रास्फीति के लक्ष्य से स्वतंत्र नहीं रह सकता. ऐसे देश जो निश्चित विनिमय दर लक्षित नहीं करते उन्हें अस्थायी चल विनिमय दर वाला माना जाता है और ये बाजार को ही विनिमय दर निर्धारित करने की छूट दे देते हैं; जिन देशों के पास विनिमय दर हैं, मौद्रिक नीति के अन्य उपकरण आम तौपर पसंद किये जाते हैं और ये विदेशी मुद्रा विनिमय हस्तक्षेप के प्रकाऔर राशि को सीमित कर सकते हैं। यहां तक कि वे केंद्रीय बैंक जो विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप को कड़ाई से सीमित करते हैं, जबकि वे अक्सर यह अनुभव कर सकते हैं कि मुद्रा बाजार अस्थायी हो सकता है और अल्पकालिक काउंटर विघटनकारी गतिविधियों के साथ हस्तक्षेप कर सकते हैं।

अगर मांग बढ़ जाती है तो एक ही विनिमय दर को बनाए रखने के लिए, केंद्रीय बैंक अधिक घरेलू मुद्रा जारी कर सकता है और विदेशी मुद्रा खरीद सकता है, जिससे विदेशी मुद्रा की आरक्षित निधि की राशि में वृद्धि होगी. इस मामले में, मुद्रा का मूल्य को नीचे ही बनाए रखा जता है; चूंकि अगर अवरोधन स्टरिलाइजेसन नहीं है) घरेलू मुद्रा की आपूर्ति बढ़ती रहती है मुद्रा मुद्रित होती रहती है, जिससे घरेलू मुद्रास्फीति उत्पन्न हो सकती है घरेलू मुद्रा के मूल्य में माल और सेवाओं के सापेक्ष गिरावट आ सकती है.

चूंकि कमजोर मुद्रा की रक्षा के लिए उपलब्ध विदेशी आरक्षित निधि की राशि ऐसी मुद्रा जिसकी मांग कम है सीमित है, फलतः विदेशी मुद्रा संकट या अवमूल्यन प्रतिफलित हो सकता है। ऐसी मुद्रा के लिए जिसकी मांग बहुत है और अधिक बढ़ती ही जाती है, विदेशी मुद्रा का आरक्षित भंडार सैद्धांतिक रूप से लगातार संचित किया जा सकता है, हालांकि अंत में घरेलू मुद्रा की आपूर्ति में हुई वृद्धि से मुद्रास्फीति पैदा हो सकती है और घरेलू मुद्रा के लिए मांग में कमी आ सकती है क्योंकि इसके सापेक्ष वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य में गिरावट आती है. व्यवहार में, कुछ केंद्रीय बैंक, खुले बाजार के परिचालन के माध्यम से अपनी मुद्रा की मूल्य-वृद्धि रोकने के उद्देश्य से, एक ही समय में पर्याप्त आरक्षित भंडार का निर्माण कर सकते हैं।

व्यवहार में, कुछ केंद्रीय बैंक या मुद्रा व्यवस्था ऐसे साधारण स्तर पर काम करते हैं और कई अन्य कारक अंतिम परिणाम को प्रभावित करेंगे. कुछ प्रभावों के रूप में जैसे कि मुद्रास्फीति के रूप में कई महीने लगेंगे या स्पष्ट होने में कई साल लग सकते हैं, विदेशी आरक्षित भंडाऔर अल्पावधि में मुद्रा मूल्यों में बदलाव काफी बड़े रूप में हो सकते है क्योंकि विभिन्न बाजार अपूर्ण आंकड़ों पर अलग-अलग प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं।

                                     

3. लागत, लाभ और आलोचनाएं

आम तौपर विदेशी मुद्रा के बड़े आरक्षित भंडार सरकार को अधिक अनुकूल आर्थिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए सरकारी विनिमय दर में हेरफेर करने की अनुमति प्रदान करते हैं। सिद्धांत रूप में विदेशी मुद्रा विनिमय दरों के हेरफेर स्थिरता प्रदान करते हैं जो कि एक स्वर्ण मानक प्रदान करता है, लेकिन व्यवहार में दरअसल मामला यह नहीं है। इसके अलावा, एक देश के पास जितनी अधिक से अधिक विदेशी आरक्षित निधि होगी, इसमें बेहतर स्थिति यही होगी कि घरेलू मुद्रा पर सट्टा के जोखिमी हमले से इसे बचाना होगा।

बड़े मुद्रा आरक्षित भंडार को बनाए रखने में लागत आती है। मुद्रा विनिमय बाजार में उतार चढ़ाव के फलस्वरूप आरक्षित भंडार की क्रय शक्ति में लाभ और हानि होती है। मुद्रा संकट के अभाव में भी उतार चढ़ाव भारी नुकसान में प्रतिफलित हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, चीन के पास विशाल अमेरिकी डॉलर-मूल्य-वर्गीकृत परिसंपत्तियां हैं, लेकिन अगर अमेरिकी डॉलर मुद्रा विनिमय बाजार में कमजोर हो जाता है, तो इस गिरावट का परिणाम चीन के लिए धन का सापेक्ष नुकसान है। दरों में विदेशी मुद्रा में उतार चढ़ाव के अलावा, मुद्रास्फीति के माध्यम से लगातार अवमूल्यन के कारण व्यवस्थापत्र की मुद्रा की क्रय शक्ति कम हो जाती है। इसलिए, एक केंद्रीय बैंक को लगातार इसके आरक्षित भंडार की मात्रा बढ़ाने के लिए विनिमय दर में हेरफेपर अपनी प्रभुसत्ता बनाए रखनी चाहिए। विदेशी मुद्रा के आरक्षित भंडार व्याज की एक छोटी सी वापसी प्रदान करते हैं। बहरहाल, यह कमी मुद्रास्फीति के कारण इसी अवधि में उस मुद्रा की क्रय-शक्ति की कमी से भी कम हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप प्रभावी रूप में नकारात्मक प्रतिफल पैदा हो सकते हैं जिसे "अर्ध राजकोषीय लागत" के रूप में जाना जाता है। इसके अलावा, बड़े आरक्षित मुद्रा भंडार उच्च आय वाली आस्तियों में निवेश किये जा सकेंगे।

                                     

4. अतिरिक्त आरक्षित निधियां

विदेशी मुद्रा की आरक्षित निधियां विदेशी कर्ज चुकाने की क्षमता और मुद्रा की रक्षा की दक्षता के महत्वपूर्ण संकेतक है, तथा राष्ट्रों की क्रेडिट रेटिंग निर्धारित करने के काम आती हैं, तथापि, अन्य सरकारी धन जिसे तरल संपत्ति के रूप में गिना जाता है उसे संकट के समय देयताओं में अंतर्भुक्त किया जा सकता है उनमे स्थिरीकरण निधियां शामिल हैं, अन्यथा जो गारंटीकृत धन निधियों के रूप में जानी जाती है। अगर उन्हें शामिल कर दिया गया, नार्वे, सिंगापुऔर फ़ारस के खाड़ी राज्य रैंक के लिहाज से इन सूचियों में ऊपर ही रहेंगे, एवं संयुक्त अरब अमीरात का 1.3 ट्रिलियन डॉलर का अबू धाबी निवेश प्राधिकरण चीन के बाद दूसरे नंबर पर होगा। विशाल विदेशी आरक्षित मुद्रा भंडार के अलावा, सिंगापुर के पास भी टेमासेक होल्डिंग्स सहित महत्वपूर्ण सरकारी गारंटीकृत धन निधियां हैं, जिनकी अतिरिक्त कीमत $145 बिलियन डॉलर आंकी गयी है तथा जीआईसी GIC है जिसकी कीमत $330 बिलियन डॉलर से अधिक मूल्यांकित की गयी है। भारत भी अपनी विदेशी मुद्रा की आरक्षित निधि से अपना निवेश फर्म बनाने की योजना बना रहा है।

                                     

5. विदेशी मुद्रा आरक्षित भण्डार के आधापर देशों की सूची

इन्हें भी देखें: List of countries by foreign exchange reserves

विदेशी मुद्रा आरक्षित भंडार की पंद्रह सर्वश्रेष्ठ देशों की निम्नलिखित सूची है:

टिप्पणियां

दुनिया के कुल विदेशी मुद्रा भंडार के 60% से अधिक कुछ इन धारकों के नाम हैं। विदेशी मुद्रा भंडार की पर्याप्तता अधिकांश समय एक पूर्ण स्तर के रूप में व्यक्त नहीं होती है, बल्कि अल्पकालिक विदेशी ऋण के एक प्रतिशत, पैसे की आपूर्ति, या औसत मासिक आयात के रूप में व्यक्त होती है।

शब्दकोश

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