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ⓘ अलिंदी स्फुरण एक प्रकार का असामान्य हृदयताल है जो हृदय के अलिंद में होता है। जब यह पहली बार होता है, यह आमतौर पे तीव्र हृदय दर या तीव्र हृदय स्‍पंदन दर के साथ ज ..


                                     

ⓘ अलिंदी स्फुरण

अलिंदी स्फुरण एक प्रकार का असामान्य हृदयताल है जो हृदय के अलिंद में होता है। जब यह पहली बार होता है, यह आमतौर पे तीव्र हृदय दर या तीव्र हृदय स्‍पंदन दर के साथ जुड़ा होता है और सुप्रा वेंट्रिक्यूलर तीव्र हृदय स्‍पंदन दर की श्रेणी में आता है। जबकि यह ताल अक्सर उन व्यक्तियों में पाया जाता है जिन्हें हृदय तथा रक्त वाहिका संबंधी रोग में अपजनित हो सकता है। हालांकि, यह शायद ही कभी वर्षों से लेकर महीनों तक जारी रहती है।

1920 में अलिंदी स्फुरण को एक चिकित्सक स्थिति के रूप में सर्वप्रथम पहचाना गया ब्रिटिश चिकित्सक 0}सर थॉमस लुईस 1882-1945 और उनके सहयोगियों के द्वारा.

                                     

1. संकेत और लक्षण

जबकि अलिंदी स्फुरण कभी-कभी ध्यान में नहीं आ सकता हैं, इसका शुरुआत नियमित घबराहट की अभिलक्षणीय बोध के द्वारा चिह्नित किया जाता है। ऐसे संवेदनायें आमतौपर तब तक रहति है जब तक प्रकरण समाप्त, या हृदय की दर नियंत्रण में होता है।

शुरू में अलिंदी स्फुरण आमतौपर अच्छी तरह से सहा जा सकता है अधिक लोगों के लिए उच्च हृदय की दर व्यायाम करने पर सिर्फ एक सामान्य प्रतिक्रिया है, हालांकि, अन्य अंतर्निहित हृदय की बीमारी या मामूली व्यायाम सहिष्णुता वाले लोगों में तेजी से लक्षण विकसित हो सकता है, जो सांस की तकलीफ, सीने में दर्द, मूर्छापन या चक्कर आना, मतली और कुछ रोगियों में, घबराहट और आसन्न कयामत की भावनाओं को शामिल कर सकता हैं।

लंबे समय तक तेजी से विकंपन क्षति-अपूर्ति को प्रभावित कर सकता है साथ में सामान्य हृदय प्रकार्य का हानि के कारण हृदय असफलता हो सकता है। यह कार्य से असहिष्णुता, व्यायाम के बाद श्वास फूलना, रात्रिकालीन श्वास फूलना, अथवा पैर या पेट की सूजन के रूप में प्रकट हो सकता है।

                                     

2. रोगलक्षण-शरीर विज्ञान

अलिंदी स्फुरण परिकोष्ठ का बायें या दाहिनी में गोलाकार ताल रीनट्रान्ट रिदम के कारण के द्वारा होता है। आम तौपर समय से पहले अलिंद में उठता हुआ बिजली से उत्पन्न होने वाली आवेग द्वारा शुरू होता है, अलिंदी स्फुरण अलिंद ऊतक की अपवर्तक अवधि में अंतर के वजह से वृद्धि होता है। यह बिजली से उत्पन्न होने वाली आवेग सृष्टि करता है जो एक स्थानीय आत्म अविरत बनाना वाली पाश में चलता रेहता है। पाश के आसपास प्रत्येक चक्र के लिए, वहाँ एक बिजली से उत्पन्न होने वाली आवेग सृष्टि होता है जो अलिंद के माध्यम से वृद्धि प्राप्त करता है।

अलिंदी स्फुरण का प्रभाव और लक्षण रोगी के हृदय की दर पर निर्भर हैं। हृदय की दर अलिंदी गतिविधि के बजाय वेंट्रिकुलर का एक माप है। अलिंद से उत्पन्न आवेगों को अलिंद वेंट्रिकुलर नोड के माध्यम से वेंट्रिक्ल पे चालित किया जाता है। पहले से दीर्घकालिन अपवर्तक अवधि के कारण मुख्यतः, ए.वी. नोड हृदय की दर पर रक्षात्मक प्रभाव के लिए जोर लगाता है 180/मिनट से अधिक अलिंदी आवेग का अवरोध करता है उदाहरण के लिए स्थिर ह्रदय दर. यह ब्लॉक रोगी की आयु पर निर्भर है और लगभग 220 से रोगी की उम्र घटाकर गणना की जा सकती है. अगर स्फुरण दर 300/मिनट है, तो वेंट्रिकुलर दर 150/मिनट अथवा 2:1 ह्रदय ब्लॉक देते हुए इन आवेगों में से सिर्फ आधे आवेगों का संवहन किया जाएगा. दर को नियंत्रित करने वाली दवाओं या संवाहक प्रणाली की बीमारी की वृद्धि इस ब्लॉक को काफी बढ़ा सकती हैं नीचे दी गई छवि देखें.

                                     

3. वर्गीकरण

अलिंदी स्फुरण दो प्रकार के होते हैं, सामान्य प्रकार I और असामान्य प्रकार II. अलिंदी स्फुरण से पीढ़ित अधिकांश व्यक्तियों में इन्ही में से एक है। शायद ही कभी किसी में दोनों प्रकार प्रकट हो, हालांकि केवल एक समय में एक ही प्रकार प्रकट हो सकता है।

                                     

3.1. वर्गीकरण प्रथम प्रकार

प्रकार I अलिंदी स्फुरण जिसका अलिंदी दर 240 से लेकर 350 स्पंदन/मिनट है और जो साधारण अलिंदी स्फुरण या आम अलिंदी स्फुरण के नाम से जाना जाता है। हालांकि, इस दर को अतालतारोधी एजेंट धीमा कर सकता है।

पुनःप्रवेशी पाश त्रिकपर्दी केवा संकीर्णपथ के बिच से दाहिनी अलिंद को परिक्रम करता है जो एक रेशेदार ऊतक है, यह निम्न अलिंद निम्न महाशिरा केवा और त्रिकपर्दी वाल्व के बिच में होता है। प्रकार I स्फुरण दो और उपप्रकार में बिभाजित किया जाता है, जो पाश में से विद्युत प्रवाह की दिशा पर आधारित है और यह घडी की विरुद्ध दिशा में अलिंदी स्फुरण और घडी की दिशा में अलिंदी स्फुरण के नाम से जाना जाता है।

  • पुनः प्रवेश पाश विपरीत दिशा में घडी की दिशा में अलिंदी स्फुरण का परिक्रम करता है, इस प्रकार स्फुरण लहरें III और aVF में सीधे रहतें हैं।
  • घडी की विरुद्ध दिशा में अलिंदी स्फुरण सर की और निर्देशित अलिंदी स्फुरण के नाम से जाना जाता है और आम तौपर यह देखा जाता है। इस ताल में स्फुरण लहरें स्पंदन लहरों ईसीजी लीड II, III और aVF में औंधा किया जाता है।

संकीर्णपथ का मूत्रशलाका अंशोच्छेदन एक ऐसा विधि है जो आमतौपर इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी प्रयोगशाला में उपलब्ध है। संकीर्णपथ के माध्यम से प्रवाहकत्त्व खत्म करना रेंट्री रोकता है और यदि यह सफल हुआ तो यह, अलिंदी स्फुरण की पुनरावृत्ति से बचाता है।

                                     

3.2. वर्गीकरण द्वितीय प्रकार

प्रकार II स्फुरण, उल्लेखनीय ढंग से अलग, प्रकार इ के पुनः प्रवेश मार्ग को अनुसरण करता है और यह विशिष्ट रूप से तेज़ है आमतौर पर340-350स्पंदन/मिनट. बायी ओर का अलिंदी स्फुरण अधूरा बायी ओर का अलिंदी अंशोच्छेदन क्रियाविधि के बाद आम है।

                                     

4. जटिलताएं

हालांकि कई बार ताल समस्या हितकारी माना जाता है। अलिंदी स्फुरण में तंतुविकसन संबंधित जाटिलताएं पाए जाते हैं। इन दोनों के स्थितियों की तुलना के बारे में बहुत कम आंकड़े हैं, लेकिन इनके मृत्यु दर समान दिखाई देता है.

                                     

4.1. जटिलताएं दर संबंधित

तेज दिल की दर पहले से मौजूद हृदय रोग वाले रोगियों में महत्वपूर्ण लक्षण पैदा हो सकता है। जिन रोगियों का निरोगी ह्रदय है उन में भी वेंट्रिक्यूलर अपघटन और हृदय गति रुक सकती है जिसकी शुरवात में लंबे समय तक वेंट्रिक्यूलर तीव्र हृदय स्‍पंदन दर यह उत्पाद करता हैं.

                                     

4.2. जटिलताएं थक्का गठन

क्योंकि अलिंद का बहुत कम प्रभावी संकुचन होता है इस लिए अलिंद में खून की ठहराव होता है। अतिसंवेदनशील व्यक्तियों के दिल में रक्त ठहराव रक्त थक्का के गठन कर सकता हैं। अलिंद शाखा में रक्त थक्का बन्ने का सबसे अधिक संभावना होता है। बाये अलिंद शाखा में रक्त थक्का सबसे महत्वपूर्ण हैं क्यूँ की दिल के बाईं ओर पुरे सरीर में रक्त की आपूर्ति करती है। इस प्रकार, किसी भी थक्का जो ह्रदय के इस भाग से हटाया जाता है वह मस्तिष्क को अंतःशल्य बना सकता है उसके साथ संभावित विनाशकारी परिणाम हेतु ह्रदय अघात का कारण बन सकता है। थक्का शरीर के किसी अन्य हिस्से को भी अंतःशल्य बना सकता है सकते हैं, हालांकि आमतौपर कम गंभीर परिणाम के साथ.

                                     

4.3. जटिलताएं अचानक हृदय की मौत

अचानक मौत अलिंदी स्फुरण के साथ जुड़ा नहीं है हालांकि, पहले से मौजूद सहयोगी संवाहक पथ जैसे वूल्फ-पार्किंसंस-श्वेत सिंड्रोम में केंट का बंडल, वाले व्यक्तियों में, सहयोगी संवाहक पथ अलिंद से वेंट्रिक्ल तक उस दर पर गतिविधियाँ कर सकतें है जिसमें सामान्यतया ए.वी. नोड अवरुध्हा हो जायेंगे. ए.वी. नोड को बाइपास करने से अलिंद का दर 300स्पंदन/मिनट वेंट्रिकुलर दर को 300स्पंदन/1:1 संवाहकता मिनट करने पर निर्देशन करता है। भले ही वेंट्रिक्ल हृदय के आउटपुट के उच्च दर को संभालने के लिए सक्षम है 1:1 स्फुरण समय के साथ साथ वेंट्रिक्यूलर तंतुविकसन में पतित हो सकता है जिस से रक्तसंचारप्रकरण ह्रदय विफलता और मौत हो सकता है।

                                     

5. चिकित्सा

साधारणता से, अलिंद स्फुरण को अलिंद विकंपन के रूप में ही इलाज किया जाना चाहिए क्योंकि दोनों ताल के वजह से अलिंद में थक्का गठन हो सकता है, अलिंद स्फुरण वाले व्यक्तियों को आमतौपर कुछ फार्म में एंटी प्लेटलेट एजेंट अथवा एंटीकोवागुलेशन की आवश्यकता होती है। दोनों ताल खतरनाक तेजी से दिल की दर के साथ सम्बंधित है और इस तरह की दर या ताल नियंत्रण के लिए दवा की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त, कुछ विशिष्ट विचारण है अलिंद स्फुरण के उपचार के लिए.

                                     

5.1. चिकित्सा हृत्तालवर्धन

अलिंद स्फुरण अलिंद विकंपन की तुलना में काफी अधिक बिजली की प्रत्यक्ष-हृत्तालवर्धन के प्रति संवेदनशील है और आमतौपर एक कम ऊर्जा शक की आवश्यकता है। 20-50J आमतौपर साइनस ताल पर वापस लौटने के लिए पर्याप्त है। इसके विपरीत, यह अपेक्षाकृत रासायनिक हृत्तालवर्धन के लिए प्रतिरोधी है और अक्सर साइनस ताल पर वापसी से पहले अलिंद विकंपन में अधःपतन होता है।

                                     

5.2. चिकित्सा पृथक्करण

अलिंदी स्फुरण की गोलाकार प्रकृति के कारण, अक्सर यह सर्किट पृथक्करण संभव है जो कि अलिंदी स्फुरण का कारण बनता है। यह इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी प्रयोगशाला में अलिंदी स्फुरण करने वाले सर्किट कि स्‍कार ऊतक पर निशान के द्वारा किया जाता है। जैसे ऊपर लिखा गया है संकीर्णपथ के पृथक्करण, अलिंदी स्फुरण का एक सामान्य उपचार है।

शब्दकोश

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