ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 52


                                               

श्री नीलकंठेश्वर महादेव, मथुरा

श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के अंतर्गत मथुरा नगर में मथुरा-वृंदावन मार्ग पर मोक्ष धाम के निकट स्थित है। इस मंदिर का उल्लेख वराह पुराण के अंतर्गत गोकर्ण सरस्वती माहात्म्य शुक्र वृत्तांत, मथुरा पुरागमन मोक्ष प्राप्ति वृ ...

                                               

श्री शिव पंचाक्षर स्तोत्र

पंचाक्षर स्तोत्र संस्कृत: श्रीशिवपंचाक्षरस्तोत्रम् एक स्तोत्र है। स्तोत्र संस्कृत साहित्य में किसी देवी-देवता की स्तुति में लिखे गये काव्य को कहा जाता है। इस स्तोत्र में शिव जी की प्रार्थना की गई है। ॐ नम: शिवाय पर निर्धारित यह श्लोक संग्रह अत्यं ...

                                               

श्रीकृष्ण का द्वारिका प्रस्थान

कौरव पाण्डव दोनों वंश काल की गति से परस्पर लड़ कर नष्ट हो गये। केवल भगवान श्रीकृष्णचन्द्र की कृपा से उत्तरा का गर्भ ही सुरक्षित रह गया। धर्मराज युधिष्ठिर के राज्य में अधर्म का नाश हो गया। वे देवराज इन्द्र की भाँति सम्पूरण पृथ्वी पर शासन करने लगे। ...

                                               

श्रीनाथजी

श्रीनाथजी श्रीकृष्ण भगवान के ७ वर्ष की अवस्था के रूप हैं। श्रीनाथजी हिंदू भगवान कृष्ण का एक रूप हैं, जो सात साल के बच्चे के रूप में प्रकट होते हैं। श्रीनाथजी का प्रमुख मंदिर राजस्थान के उदयपुर शहर से 48 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित नाथद्वारा के ...

                                               

श्रुति

श्रुति हिन्दू धर्म के सर्वोच्च और सर्वोपरि धर्मग्रन्थों का समूह है। श्रुति का शाब्दिक अर्थ है सुना हुआ, यानि ईश्वर की वाणी जो प्राचीन काल में ऋषियों द्वारा सुनी गई थी और शिष्यों के द्वारा सुनकर जगत में फैलागई थी। इस दिव्य स्रोत के कारण इन्हें धर् ...

                                               

संकल्प (हिन्दू मान्यता)

संकल्प का अर्थ है किसी अच्छी बात को करने का दृढ निश्चय करना। सनातन धर्म में किसी भी पूजा-पाठ, अनुष्ठान या जाप करने से पहले संकल्प करना अति आवश्यक होता है, और बिना संकल्प के शास्त्रों में पूजा अधूरी मानी गयी है। मान्यता है कि संकल्प के बिना की गई ...

                                               

संन्यास

हिन्दू धर्म में जीवन के ४ भाग किगए हैं- ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। चौथा भाग सन्यास का अर्थ एक न्यासी या ट्रस्टी की तरह जीवन व्यतीत करना होता है। इस आश्रम का उद्देश्य मोक्ष की प्राप्ति है। मनुष्य जीवन को १०० वर्षों का मानकर ७५ वर्ष ...

                                               

अन्नप्राशन संस्कार

जब शिशु के दाँत उगने लगे, मानना चाहिए कि प्रकृति ने उसे ठोस आहार, अन्नाहार करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है। स्थूल के विकास के लिए तो अन्न के विज्ञान सम्मत उपयोग का ज्ञान जरूरी है यह सभी जानते हैं। सूक्ष्म विज्ञान के अनुसार अन्न के संस्कार का प्र ...

                                               

केशांत संस्कार

सनातन अथवा हिन्दू धर्म की संस्कृति संस्कारों पर ही आधारित है। हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव जीवन को पवित्र एवं मर्यादित बनाने के लिये संस्कारों का अविष्कार किया। धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक दृष्टि से भी इन संस्कारों का हमारे जीवन में विशेष महत्व है। भा ...

                                               

सगुण ब्रह्म

परमात्मा का वह रूप जो तीन प्राकृतिक गुणों सत्व, रज और तम से परे है,तथा जिसमे माधुर्य,ऐश्वर्य,औदार्य आदि जो दिव्य गुण है उनके सहित सर्वत्र व्यापक परमात्मा को सगुण कहते है। जब ब्रह्म, कर्ता का भाव ग्रहण करता है जैसे सृष्‍टि‍कर्ता, पालनकर्ता, संहारक ...

                                               

सनातन गोस्वामी

सनातन गोस्वामी, चैतन्य महाप्रभु के प्रमुख शिष्य थे। उन्होने गौड़ीय वैष्णव भक्ति सम्प्रदाय की अनेकों ग्रन्थोंकी रचना की। अपने भाई रूप गोस्वामी सहित वृन्दावन के छ: प्रभावशाली गोस्वामियों में वे सबसे ज्येष्ठ थे।

                                               

सप्त द्वीप

यह पृथ्वी सात द्वीपों में बंटी हुई है। वे द्वीप एस प्रकार से हैं:- प्लक्षद्वीप कुशद्वीप पुष्करद्वीप शाल्मलद्वीप शाकद्वीप क्रौंचद्वीप जम्बूद्वीप ये सातों द्वीप चारों ओर से क्रमशः खारे पानी, इक्षुरस, मदिरा, घृत, दधि, दुग्ध और मीठे जल के सात समुद्रो ...

                                               

सप्त सागर

विष्णु पुराण के अनुसार यह पृथ्वी सात द्वीपों में बंटी हुई है। ये सातों द्वीप चारों ओर से क्रमशः खारे पानी, इक्षुरस, मदिरा, घृत, दधि, दुग्ध और मीठे जल के सात समुद्रों से घिरे हैं। ये सभी द्वीप एक के बाद एक दूसरे को घेरे हुए बने हैं और इन्हें घेरे ...

                                               

सप्तनदी

हिन्दू धर्म में, सप्तनदी, सात वैदिक काल की नदियों के समूह को कहा जाता है। सप्तनदियों की मान्यता बहुत मानी जाती है। इनमें गंगा, गोदावरी, यमुना, सिंधु, सरस्वती, कावेरी और नर्मदा नदी आती हैं। सप्त नदियों के जल में सकारात्मक ऊर्जा को आकृष्ट करने और उ ...

                                               

सप्तर्षि तारामंडल

सप्तर्षि तारामंडल पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध के आकाश में रात्रि में दिखने वाला एक तारामंडल है। इसे फाल्गुन-चैत महीने से श्रावण-भाद्र महीने तक आकाश में सात तारों के समूह के रूप में देखा जा सकता है। इसमें चार तारे चौकोर तथा तीन तिरछी रेखा में रहते है ...

                                               

समावर्तन संस्कार

समावर्तन संस्कार हिन्दुओं का १२वाँ संस्कार है। प्राचीन काल में गुरुकुल में शिक्षा पूर्ण होने के पश्चात जब जातक की गुरुकुल से विदाई की जाती है तो आगामी जीवन के लिये उसे गुरु द्वारा उपदेश देकर विदाई दी जाती है। इसी को समावर्तन संस्कार कहते हैं। इसस ...

                                               

समुद्र मन्थन

श्री शुकदेव जी बोले, "हे राजन्! राजा बलि के राज्य में दैत्य, असुर तथा दानव अति प्रबल हो उठे थे। उन्हें शुक्राचार्य की शक्ति प्राप्त थी। इसी बीच दुर्वासा ऋषि के शाप से देवराज इन्द्र शक्तिहीन हो गये थे। दैत्यराज बलि का राज्य तीनों लोकों पर था। इन्द ...

                                               

सरयू

सरयू नदी हिमालय से निकलकर उत्तरी भारत के गंगा मैदान में बहने वाली नदी है जो बलिया और छपरा के बीच में गंगा में मिल जाती है। अपने ऊपरी भाग में, जहाँ इसे काली नदी के नाम से जाना जाता है, यह काफ़ी दूरी तक भारत उत्तराखण्ड राज्य और नेपाल के बीच सीमा बन ...

                                               

सरस्वती देवी

सरस्वती हिन्दू धर्म की प्रमुख देवियों में से एक हैं। वे भगवान ब्रह्माजी की पत्नी हैं जो विद्या की अधिष्ठात्री देवी मानी गई हैं। इनका नामांतर शतरूपा भी है। इसके अन्य पर्याय हैं, वाणी, वाग्देवी, भारती, शारदा, वागेश्वरी इत्यादि। ये शुक्लवर्ण, श्वेत ...

                                               

सहस्रनाम

सहस्रनाम संस्कृत साहित्य में एक प्रकार का स्तोत्र रचना होती है जिसमें किसी देवता के एक सहस्र नामों का उल्लेख होता है, जैसे विष्णुसहस्रनाम, ललितासहस्रनाम आदि।

                                               

साध

साध उन कुछ अन्तर्विवाही में से एक है जो हिन्दू धर्म में गिना जाता है। वो भगवान को सतवगात् के नाम से पुकारते हैं जिसका अर्थ "सत्य नाम"। उनकी अधिकतर प्रथायें और परम्परायें हिन्दू धर्म के संगत होती हैं क्योंकि वो हिन्दू धर्म से परिवर्तन के बाद ही बन ...

                                               

सिंधुरा

                                               

सिद्धमंगल स्तोत्र

॥ श्रीपादराजम् शरणम् प्रपद्ये ॥ श्री मदनंत श्रीविभुषीत अप्पल लक्ष्मी नरसिंह राजा । जय विजयीभव, दिग्विजयीभव, श्रीमदखंड श्री विजयीभव ॥१॥ श्री विद्याधारी राधा सुरेखा श्री राखीधर श्रीपादा । जय विजयीभव, दिग्विजयीभव, श्रीमदखंड श्री विजयीभव ॥२॥ माता सुम ...

                                               

सिद्धिदात्री

माँ दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्र-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप् ...

                                               

सुदर्शनाचार्य

जगद्गुरु सुदर्शनाचार्य श्री रामानुजाचार्य द्वारा स्थापित वैष्णव सम्प्रदाय के एक प्रख्यात हिन्दू सन्त थे जिन्हें तपोबल से असंख्य सिद्धियाँ प्राप्त थीं। राजस्थान प्रान्त में सवाई माधोपुर जिले के पाड़ला ग्राम में एक ब्राह्मण जाति के कृषक परिवार में ...

                                               

सुन्दा विवितान

सुन्दा विवितान इण्डोनेशिया के जावा द्वीप के सुन्दा लोगों का प्राचीन व पारम्परिक धर्म है। इसमें पूर्वजों के लिये आस्था और सर्वात्मवाद के गहरे तत्व हैं और बहुत सी हिन्दू धर्म व बौद्ध धर्म की अवधारणाएँ भी हैं। सुन्दा विवितान के धार्मिक ग्रन्थ का नाम ...

                                               

सुयज्ञ

भगवान् विष्णु के प्रसिद्ध 24 अवतारों के नाम एवं क्रम में धर्म-शास्त्रीय ग्रंथों में अंतर मिलता है। प्रख्यात वैष्णव ग्रंथ श्रीमद्भागवत महापुराण में ही भगवान् विष्णु के 22 अवतारों की दो सूचियाँ मिलती हैं और दोनों के कतिपय नाम एवं क्रम में अंतर है; ...

                                               

सूर्य मण्डल

हिन्दू धर्म में विष्णु पुराण के अनुसार, कृतक त्रैलोक्य -- भूः, भुवः और स्वः – ये तीनों लोक मिलकर कृतक त्रैलोक्य कहलाते हैं। सूर्य मण्डल पृथ्वी लोक से एक लाख योजन दूर सूर्य मण्डल है।

                                               

सेन्ट्रल चिन्मय मिशन ट्रस्ट

सन् 1947 में सैकड़ों वर्षों की पराधीनता के बाद भारतवर्ष को राजनैतिक स्वतन्त्रता प्राप्त हुई, किन्तु समाज के प्रमुख लोगों में पश्चिमी सभ्यता का रंग चढ़ा था। हिन्दू धर्म का महत्व हिन्दू के मन में ही लुप्त हो गया था। धर्म और संस्कृति ही किसी राष्ट्र ...

                                               

सोमनाथ मन्दिर

सोमनाथ मन्दिर भूमंडल में दक्षिण एशिया स्थित भारतवर्ष के पश्चिमी छोपर गुजरात नामक प्रदेश स्थित, अत्यन्त प्राचीन व ऐतिहासिक सूर्य मन्दिर का नाम है। यह भारतीय इतिहास तथा हिन्दुओं के चुनिन्दा और महत्वपूर्ण मन्दिरों में से एक है। इसे आज भी भारत के १२ ...

                                               

सौर सम्प्रदाय

सौर आर्थत सूर्य कि उपसना करने वाला सम्प्रदाय सौर कहलाते हैं। यह सम्प्रदाय वैदिक काल से ही अस्त्तित्व में है । सनातन धर्म की वर्ण व्यवस्था में सूर्य की उपासना का उलेख मिलता है । ब्राह्मणों में संध्या कर्म में सूर्य की उपासना का ही वर्णन है । "सौर" ...

                                               

स्तुति

प्रार्थना का दूसरा रूप स्तुति कहलाता है। प्रार्थना साधारण रूप में की जाती है जबकि स्तुति करने के लिये पहले सभी तरह की पूजा अर्चना कर ली जाती है और बाद में स्तुति की जाती है।

                                               

स्तोत्ररत्नावली

स्तोत्ररत्नावली विभिन्न देवी-देवताओं के स्तोत्रों का एक संग्रह है। इसमें गणेश, शिव, शक्ति, विष्णु, राम, कृष्ण एवं सूर्य आदि प्रमुख देवताओं के प्रसिद्ध स्तोत्रों का संग्रह किया गया है। अन्त में प्रकीर्ण स्तोत्रों में देवताओं के प्रातः स्मरण तथा कु ...

                                               

स्मार्त सूत्र

प्राचीन वैदिक साहित्य की विशाल परंपरा में अंतिम कड़ी सूत्रग्रंथ हैं। यह सूत्र-साहित्य तीन प्रकार का है: श्रौतसूत्र, गृह्यसूत्र तथा धर्मसूत्र । वेद द्वारा प्रतिपादित विषयों को स्मरण कर उन्हीं के आधापर आचार-विचार को प्रकाशित करनेवाली शब्दराशि को "स ...

                                               

स्वयं भगवान

स्वयं भगवान का अर्थ है, ईश्वर के परम स्वरूप । भगवान उसको कहते हैं जो सभी धन, सम्पूर्ण शक्तियों, सम्पूर्ण यश, सम्पूर्ण सौन्दर्य, सम्पूर्ण ज्ञान और सम्पूर्ण वैराग्य का स्वामी हो। गीता के अनुसार श्रीकृष्ण स्वयं भगवान हैं। स्वयं भगवान शब्द का प्रयोग ...

                                               

स्वयंभुव मनु

स्वयंभुव मनु संसार के प्रथम पुरुष थे ऐसी हिंदू मान्यता है। सुखसागर के अनुसार सृष्टि की वृद्धि के लिये ब्रह्मा जी ने अपने शरीर को दो भागों में बाँट लिया जिनके नाम का और या हुये। उन्हीं दो भागों में से एक से पुरुष तथा दूसरे से स्त्री की उत्पत्ति हु ...

                                               

स्वयंभू

                                               

स्वर्ग लोक

स्वर्ग लोक या देवलोक हिन्दू मान्यता के अनुसार ब्रह्माण्ड के उस स्थान को कहते हैं जहाँ हिन्दू देवी-देवताओं का वास है। रघुवंशम् महाकाव्य में महाकवि कालिदास स्मृद्धिशाली राज्य को ही स्वर्ग की उपमा देते हैं। तद्रक्ष कल्याणपरम्पराणां भोक्तारमूर्जस्वलम ...

                                               

स्वामी

स्वामी नाथ योगी संतो को कहा जाता हैं जो धार्मिक/पंथ समुदाय में दीक्षित हो । सबसे पहले स्वामी शब्द का उपयोग नाथ संप्रदाय के संतों को बोला गया नाथ का अर्थ स्वामी बाद में पत्नियां अपने पति को प्राण नाथ व स्वामी बोल कर सम्भोदित करती थी । मालिक को भी ...

                                               

स्वामी दयाल बाबा

                                               

स्वामीनारायण सम्प्रदाय

स्वामीनारायण सम्प्रदाय का एक भाग है। इसे स्वामीनारायण ने स्थापित किया था। गुरु रामानन्द स्वामी ने विशिष्टाद्वैयता की सीख को बढ़ाने के लिए स्वामीनारायण को उऊद्धव सम्प्रदाय का आचार्या बनाया। स्वामीनारायण सम्प्रदाय के प्रवर्तक स्वामी नारायण जी का जन ...

                                               

स्वीकारपत्र

स्वीकारपत्र आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा रचित एक लघु पुस्तिका है। यह मूलतः राजकीय मुद्रा पत्पर लिखित एक वसीयतनामे की तरह है जिसमें उन्होंने अपने देह त्यागने के बाद अपना काम आगे बढ़ाने के लिए परोपकारिणी सभा का वर्णन किया है।

                                               

हर की पौड़ी

हर की पौड़ी या हरि की पौड़ी भारत के उत्तराखण्ड राज्य की एक धार्मिक नगरी हरिद्वार का एक पवित्और सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। इसका भावार्थ है "हरि यानी नारायण के चरण"।

                                               

हरे कृष्ण (मंत्र)

हरे कृष्ण मंत्र कलि संतारण उपनिषद में वर्णित एक मंत्र है जिसे वैष्णव लोग महामन्त्र कहते हैं। १५वीं शताब्दी में चैतन्य महाप्रभु के भक्ति आन्दोलन के समय यह मंत्र प्रसिद्ध हुआ। यह मंत्र निम्नलिखित है- हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम ...

                                               

हवन

हवन अथवा यज्ञ भारतीय परंपरा अथवा हिंदू धर्म में शुद्धीकरण का एक कर्मकांड है। कुण्ड में अग्नि के माध्यम से ईश्वर की उपासना करने की प्रक्रिया को यज्ञ कहते हैं। हवि, हव्य अथवा हविष्य वह पदार्थ हैं जिनकी अग्नि में आहुति दी जाती है.हवन कुंड में अग्नि ...

                                               

हवन कुंड

अग्नि के द्वारा देवताओं को पहुंचाने वाले सोम के लिये हवन कुंड का प्रयोग किया जाता है। हवन कुंड को वेदी के अनुसार बनाया जाता है। एक वेदी का हवन कुंड रोजाना के भोजन को पकाने के काम में लिया जाता है। द्वि वेदी का हवन कुंड साधारण ब्राह्मण के द्वारा अ ...

                                               

हविर्भू

हविर्भू कर्दम ऋषि एवं देवहूति की चतुर्थ कन्या थी। हविर्भू का विवाह पुलस्त्य ऋषि के साथ हुआ था। पुलस्त्य और हविर्भू से अगस्त्य और विश्रवा का जन्म हुआ। विश्रवा की दूसरी पत्नी केसिनी के गर्भ से रावण, कुम्भकर्ण तथा विभीषण उत्पन्न हुये।

                                               

हिंदू साहित्य

वेद ४ हैं जो हिन्दुओं के सबसे प्राचीन और मूल ग्रंथ हैं। इन्हें विश्व के सबसे प्राचीन साहित्य होने का गौरव भी हासिल है। पूर्व समय में छपाई Printing की सुविधा ना होने के कारण गुरु अपने शिष्यों को बोल कर याद कराते थे। सुन कर याद रखना और अगली पीढ़ी क ...

                                               

हिन्दुओं का उत्पीड़न

हिन्दुओं का उत्पीडन हिन्दुओं के शोषण, जबरन धर्मपरिवर्तन, सामूहिक नरसहांर, गुलाम बनाने तथा उनके धर्मस्थलो, शिक्षणस्थलों के विनाश के सन्दर्भ में है। मुख्यतः भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा मलेशिया आदि देशों में हिन्दुओं को उत्पीडन से गुजरना पड़ा थ ...

                                               

हिन्दू ऐक्य वेदी

हिन्दू ऐक्य वेदी भारत के केरल प्रदेश में सक्रिय एक हिन्दू संगठन है। इसका प्रमुख उद्देश्य हिन्दू संगठनों को एकत्र करना है। इसकी स्थापना स्वामी सत्यानन्द सरस्वती ने की थी।

शब्दकोश

अनुवाद
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