ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 354


                                               

तिरमिज़

तिरमिज़ मध्य एशिया के उज़बेकिस्तान देश के दक्षिणी भाग में स्थित सुरख़ानदरिया प्रान्त की राजधानी है। यह उज़बेकिस्तान की अफ़्ग़ानिस्तान के साथ सरहद के पास प्रसिद्ध आमू दरिया के किनारे बसा हुआ है। इसकी आबादी सन् २००५ में १,४०,४०४ थी।

                                               

तेलंगाना

तेलंगाना, भारत के आन्ध्र प्रदेश राज्य से अलग होकर बना भारत का २९वाँ राज्य है। हैदराबाद को दस साल के लिए तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की संयुक्त राजधानी बनाया जाएगा। यह परतन्त्र भारत के हैदराबाद नामक राजवाडे के तेलुगूभाषी क्षेत्रों से मिलकर बना है। ते ...

                                               

तैमूरी राजवंश

तैमूरी राजवंश, जो स्वयं को गुरकानी राजवंश कहते थे, मध्य एशिया और उत्तरी भारतीय उपमहाद्वीप के विस्तृत इलाक़ों पर राज करने वाला तुर्की-मंगोल नस्ल का एक सुन्नी मुस्लिम वंश था। अपने चरम पर इसके साम्राज्य में समस्त ईरान, अफ़्ग़ानिस्तान और उज़बेकिस्तान ...

                                               

त्रिगर्त राज्य

त्रिगर्त साम्राज्य भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर भारतीय क्षेत्र में एक प्राचीन राज्य था जिसकी राजधानी प्रथला और कांगड़ा में किले के साथ थी। प्राचीन काल से त्रिगर्त पर कटोच वंश का शासन था।

                                               

दक्खिन के सल्तनत

बहमनी सल्तनत का 1518 में विघटन हो गया जिसके फलस्वरूप - गोलकोण्डा, बीजापुर, बिदर, बिराऔर अहमदनगर के राज्यों का उदय हुआ। इन पाँचों को सम्मिलित रूप से दक्कन सल्तनत कहा जाता था।

                                               

दरभंगा राज

दरभंगा राज बिहार प्रान्त के मिथिला क्षेत्र में लगभग 8380 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ था। इसका मुख्यालय दरभंगा शहर था। इस राज की स्थापना मैथिल ब्राह्मण जमींदारों ने 16वीं सदी की शुरुआत में की थी। ब्रिटिश राज के दौरान तत्कालीन बंगाल के 18 सर्किल ...

                                               

दशपुर

दशपुर अवंति का प्राचीन नगर था, जो मध्य प्रदेश के ग्वालियर क्षेत्र में उस नाम के नगर से कुछ दूर उत्तर पश्चिम में स्थित आधुनिक मंदसौर है। भारतीय इतिहास के प्राचीन युग में उत्तर भारत में जब भी साम्राज्य स्थापित हुए, अवंति प्राय: उनका एक प्रांत रहा। ...

                                               

दादरा नगर हवेली मुक्ति संग्राम

सन्‌ १९५४ में भारत को स्वतंत्र हुए ७ वर्ष हो चुके थे। अंग्रेजों के जाने के साथ ही फ्रांस ने एक समझौते के तहत पांडिचेरी, कारिकल, चन्द्रनगर आदि क्षेत्र भारत सरकार को दे दिए, किन्तु अंग्रेजों के पूर्व आए पुर्तगालियों ने भारत में अपने पैर जमाए रखे। श ...

                                               

दाहिर (राजा)

राजा दाहिर सिंध के सिंधी ब्राह्मण सैन राजवंश के अंतिम राजा थे। उनके समय में ही अरबों ने सर्वप्रथम सन ७१२ में भारत पर आक्रमण किया था।मोहम्मद बिन कासिम मिशन 712 में सिंध पर आक्रमण किया था जहां पर राजा दहिर सैन ने उन्हें रोका और उनके साथ युद्ध लड़ा ...

                                               

दिल्ली सल्तनत

इतिहासकारों के मत से 1206 से 1526 तक भारत पर शासन करने वाले पाँच वंश के सुल्तानों के शासनकाल को दिल्ली सल्तनत या सल्तनत-ए-हिन्द / सल्तनत-ए-दिल्ली कहा जाता है। ये पाँच वंश थे- गुलाम वंश, ख़िलजी वंश, तुग़लक़ वंश, सैयद वंश, तथा लोदी वंश । इनमें से प ...

                                               

दुर्गा दल

भारत में ब्रिटिश राज के विरुद्ध झांसी की रानी लक्ष्मीबाई द्वारा गठित महिला सेना थी, जिसको रानी ने हिंदु देवी दुर्गा के नाम पर दुर्गा दल नाम दिया था। इसका नेतृत्व रानी लक्ष्मीबाई और झलकारी बाई ने किया था।

                                               

दुर्रानी साम्राज्य

दुर्रानी साम्राज्य एक पश्तून साम्राज्य था जो अफ़्ग़ानिस्तान पर केन्द्रित था और पूर्वोत्तरी ईरान, पाकिस्तान और पश्चिमोत्तरी भारत पर विस्तृत था। इस १७४७ में कंदहार में अहमद शाह दुर्रानी ने स्थापित किया था जो अब्दाली कबीले का सरदार था और ईरान के नाद ...

                                               

देशी आर्य सिद्धान्त

देशी आर्य सिद्धान्त, आर्य प्रवास मॉडल का विरुद्ध एवं वैकल्पिक सिद्धान्त है जिसके अनुसार भारतीय-यूरोपीय भाषाएँ, या कम से कम इंडो-आर्यन भाषाएँ, भारतीय उपमहाद्वीप के भीतर ही उत्पन्न हुईं। इस मॉडल को बहिर्भारत सिद्धान्त भी कहते हैं। इस सिद्धान्त के प ...

                                               

दौलतराव शिंदे

महादजी शिंदे की मृत्यु के पश्चात् उसका दत्त्क पुत्र दौलतराव १४ वर्ष की अपिरपक्व अवस्था में उसका उत्तराधिकारी बना। एक तो वह प्रकृति से उद्धत तथा अदूरदर्शी था; दूसरे नीम चढ़े करेले की तरह उसे कुसंगति भी बाजीराव जैसे धूर्त और शर्जाराव जैसे नृशंस व्य ...

                                               

नंद वंश

नंदवंश प्राचीन भारत का एक राजवंश था।पुराणों में इसे महापद्मनंद कहा गया है । उसे महापद्म एकारात पूराण मे काहागया है, सर्व क्षत्रान्तक आदि उपाधियों से विभूषित किया गया है । जिसने पाँचवीं-चौथी शताब्दी ईसा पूर्व उत्तरी भारत के विशाल भाग पर शासन किया। ...

                                               

नरेन्द्रमण्डल

नरेन्द्रमण्डल अथवा नरेशमण्डल भारतवर्ष का एक पूर्व विधान मंडल था। यह ब्रिटिशकालीन भारत के विधान मंडल का एक उच्च व शाही सदन था। इसकी स्थापना सन 1920 में ब्रिटेन के राजा, सम्राट जौर्ज पंचम के शाही फ़रमान द्वारा हुई थी। इस्की स्थापना करने का मूल उद्द ...

                                               

नाना फडनवीस

नाना फडनवीस बालाजी जनार्दन भानु उर्फ नाना फडनवीस का जन्म सतारा में हुआ था। यह चतुर राजनीतिज्ञ तथा देशभक्त था और इसमें व्यावहारिक ज्ञान तथा वास्तविकता की चेतना जागृत थी। इसमें तीन गुण थे - स्वामिभक्ति, स्वाभिमान, तथा स्वदेशाभिमान। इसके जीवन की यही ...

                                               

निज़ाम-अली-खान - अासफ जाह II

मीर निजाम अली खान सिद्दीकी बायफांडी - असफ जाह II ; 1762 और 1803 के बीच दक्षिणी भारत में हैदराबाद राज्य का निजाम था। उनका जन्म 7 मार्च 1734 को असफ जाह I और रानी उम्दा बेगम के चौथे पुत्र के रूप में हुआ था। उनका आधिकारिक नाम असफ जहां द्वितीय, निजाम- ...

                                               

नूहानी वंश

बिहार के मध्यकालीन इतिहास में नूहानी वंश का उदय एक महत्वपूर्ण एवं विशिष्ट स्थान रखता है क्योंकि इसके उदय में सिकन्दर लोदी के शासनकालीन अवस्था में हुए राजनैतिक परिवर्तनों से जुड़ा है। जब सिकन्दर लोदी सुल्तान बना तो उसका भाई वारवाक शाह ने विद्रोह क ...

                                               

परमार वंश

परमार या पँवार मध्यकालीन भारत का एक अग्निवंशी क्षत्रिय राजवंश था। इस राजवंश का अधिकार धार-मालवा-उज्जयिनी-आबू पर्वत और सिन्धु के निकट अमरकोट आदि राज्यों तक था। लगभग सम्पूर्ण पश्चमी भारत क्षेत्र में परमार वंश का साम्राज्य था। ये ८वीं शताब्दी से १४व ...

                                               

पल्लव राजवंश

पल्लव राजवंश प्राचीन दक्षिण भारत का एक राजवंश था। चौथी शताब्दी में इसने कांचीपुरम में राज्य स्थापित किया और लगभग ६०० वर्ष तमिल और तेलुगु क्षेत्र में राज्य किया। बोधिधर्म इसी राजवंश का था जिसने ध्यान योग को चीन में फैलाया। यह राजा अपने आप को क्षत् ...

                                               

पहाड़गढ़

मुरैना के निकट, पहाडगढ़ से 12 मील की दूरी पर 86 गुफाओं की श्रृंखला देखी जा सकती है। इन गुफाओं को भोपाल की भीमबेटका गुफाओं का समकालीन माना जाता है। सभ्यता के प्रारंभ में लोग इन गुफाओं में आश्रय लेते थे। गुफाओं में पुरूष, महिला, चिड़िया, पशु, शिकाऔ ...

                                               

पाण्ड्य राजवंश

तमिल प्रदेश का इतिहास प्रारंभ से ही मुख्य रूप से तीन राजवंशों का इतिहास रहा है- चोल, चेर और, पांड्य। इनमें से पांड्य राजवंश का अधिकार इस प्रदेश के दक्षिणी पूर्वी छोपर था। उत्तर में पांड्य राज्य पुथुक्कट्टै राज्य तक फैला था; वल्लरु नदी इसकी उत्तरी ...

                                               

पानीपत का द्वितीय युद्ध

पानीपत का द्वितीय युद्ध उत्तर भारत के हेमचंद्र विक्रमादित्य और अकबर की सेना के बीच 5 नवम्बर 1556 को पानीपत के मैदान में लड़ा गया था। अकबर के सेनापति खान जमान और बैरम खान के लिए यह एक निर्णायक जीत थी। इस युद्ध के फलस्वरूप दिल्ली पर वर्चस्व के लिए ...

                                               

पाल वंश

पाल साम्राज्य मध्यकालीन "उत्तर भारत" का सबसे शक्तिशाली और महत्वपूर्ण साम्राज्य माना जाता है, जो कि ७५० - ११७४ इसवी तक चला। "पाल राजवंश" को "गुुप्त राजवंश" भी कहा गया है । पाल राजवंश ने भारत के पूर्वी भाग में एक विशाल साम्राज्य बनाया। इस राज्य में ...

                                               

पिट का भारत अधिनियम

सन् 1773 ई. के रेग्युलेटिंग एक्ट की कमियों को दूर करने और ईस्ट इंडिया कंपनी के भारतीय क्षेत्रों के प्रशासन को अधिक सक्षम और उत्तरदायित्वपूर्ण बनाने के लिये अगले एक दशक के दौरान जाँच के कई दौर चले और ब्रिटिश संसद द्वारा अनेक कदम उठाये गए। इनमें सब ...

                                               

पुणे समझौता

पूना पैक्ट अथवा पूना समझौता भीमराव आम्बेडकर एवं महात्मा गांधी के मध्य पुणे की यरवदा सेंट्रल जेल में 24 सितम्बर, 1932 को हुआ था। अंग्रेज सरकार ने इस समझौते को सांप्रदायिक अधिनिर्णय में संशोधन के रूप में अनुमति प्रदान की। समझौते में दलित वर्ग के लि ...

                                               

पुर्तगाली भारत

भारत में पुर्तगाल की उपनिवेश थी या पुर्तगाली भारतीय राज्य। वास्को दा गामा ने यूरोप से एशिया भारत के समुद्री मार्ग की खोज के छह साल बाद, यानी, 1505 में, भारत में पुर्तगाली की शक्ति फ्रांसेस्को डी अल्मेडा की नियुक्ति के साथ कोच्चि में पहले पुर्तगाल ...

                                               

पुष्पभूति

पुष्पभूति प्राचीन भारत का प्रसिद्ध राजवंश था जिसने लगभग छठी शताब्दी के अंत से लेकर लगभग सातवीं शताब्दी के मध्य तक राज्य किया। बाणभट्ट के अनुसार इस वंश का संस्थापक पुष्पभूति था। वह श्रीकंठ जनपद का राजा था तथा स्थाणीश्वर उसकी राजधानी थी। बाण ने बता ...

                                               

पूर्वी चालुक्य

पूर्वी चालुक्य सोलंकी या वेंगी के चालुक्य दक्षिणी भारत का एक राजवंश था, जिनकी राजधानी वर्तमान आंध्र प्रदेश में वेंगी थी। पूर्वी चालुक्यों ने ७वीं शताब्दी से आरम्भ करके ११३० ई तक लगभग ५०० वर्षों तक शासन किया। इसके बाद वेंगी राज्य चोल साम्राज्य में ...

                                               

पृथ्वीराज

पृथ्वीराज बीकानेरनरेश राजसिंह के भाई जो अकबर के दरबार में रहते थे। वे वीर रस के अच्छे कवि थे और मेवाड़ की स्वतंत्रता तथा राजपूतों की मर्यादा की रक्षा के लिये सतत संघर्ष करनेवाले महाराणा प्रताप के अनन्य समर्थक और प्रशंसक थे। जब आर्थिक कठिनाइयों तथ ...

                                               

प्रतापसिंह छत्रपति

प्रतापसिंह छत्रपति शाहू द्वितीय के पुत्र थे। प्रतापसिंह पिता के मृत्यु के बाद सतारा के सिंहासन पर बैठा १८०८। वह सच्चरित्र, उदार, बुद्धिमान्, विद्याप्रेमी तथा धार्मिक वृत्ति का व्यक्ति था। सतारा की सत्ता तो पहिले ही शून्यप्राय हो चुकी थी। पेशवा बा ...

                                               

प्रतीच्य चालुक्य

प्रतीच्य चालुक्य पश्चिमी भारत का राजवंश था जिसने २१६ वर्ष राज किया। सोमेश्वर १ 1042 - 1068 जगधेकमल्ल ३ 1163 – 1183 सोमेश्वर २ 1068 -1076 सोमेश्वर ४ 1184 – 1200 तैलप ३ 1151 - 1164 सत्यश्रय 997 - 1008 सोमेश्वर ३ 1126 – 1138 विक्रमादित्य ६ 1076 - 11 ...

                                               

प्राचीन भारत

मानव के उदय से लेकर दसवीं सदी तक के भारत का इतिहास प्राचीन भारत का इतिहास कहलाता है। == प्राचीन भारतीयों इतिहास की जानकारी के साधन ==puratatva aur likhit sahitya {{मुख्य|प्राचीन भारतीय इतिहास की 3 bhago me banta gaya hai.,1- pragaitihasik kal, 2- ...

                                               

प्राचीन भारतीय इतिहास की जानकारी के साधन

यूँ तो भारत के प्राचीन साहित्य तथा दर्शन के संबंध में जानकारी के अनेक साधन उपलब्ध हैं, परन्तु भारत के प्राचीन इतिहास की जानकारी के स्रोत संतोषप्रद नहीं है। उनकी न्यूनता के कारण अति प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं शासन का क्रमवद्ध इतिहास नहीं मिलता है ...

                                               

फ्रांसीसी भारत

फ्रांसीसी भारत 17 वीं सदी के दूसरे आधे में भारत में फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा स्थापित फ्रांसीसी प्रतिष्ठानों के लिए एक आम नाम है और आधिकारिक तौपर एस्तब्लिसेमेन्त फ्रन्से द्दे इन्द्दए रूप में जाना जाता, सीधा फ्रेंच शासन 1816 शुरू हुआ और 1 ...

                                               

बंगाल का इतिहास

भारत के प्रागैतिहासिक काल के इतिहास में भी बंगाल का विशिष्‍ट स्‍थान है। सिकंदर के आक्रमण के समय बंगाल में गंगारिदयी नाम का साम्राज्‍य था। गुप्‍त तथा मौर्य सम्राटों का बंगाल पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ा। बाद में शशांक बंगाल नरेश बना। कहा जाता है कि उ ...

                                               

बंगाल के नवाब

नसीरी 1717-1740 मुर्शीद कुली जाफर खान 1717-1727 शुजा-उद-दीन मुहम्मद खान 1727-1739 सरफराज़ खान 1739-1740 अफशर 1740-1757 अलीवर्दी खान 1740-1756 सिराजुद्दौला 1756-1757 नजफी 1757-1880 मीर जाफर अली खान 1757-1760 मुबारक अली खान II 1824-1838 नजीमुद्दीन ...

                                               

बनारस विद्रोह

वह 16 अगस्त 1781 का दिन था। अचानक पूरी काशी नगरी में बिजली की भांति यह खबर फैल गई कि ईस्ट इंडिया कम्पनी के अंग्रेज अफसर वारेन हेस्टिंग्स ने काशी नरेश महाराज चेत सिंह को उनके शिवाला स्थित राजमहल में बंदी बना लिया है। कारण था, हेस्टिंग्स की घूस-खोर ...

                                               

बप्पा रावल

बप्पा रावल मेवाड़ राज्य में गुहिल राजपूत राजवंश के संस्थापक राजा थे। बप्पारावल का जन्म मेवाड़ के महाराजा गुहिल की मृत्यु के 191 वर्ष पश्चात 712 ई. में ईडर में हुआ। उनके पिता ईडर के शाषक महेंद्र द्वितीय थे। बप्पा रावल गुहिल राजपूत राजवंश के वास्तव ...

                                               

बिम्बिसार

बिम्बिसार मगध साम्राज्य का सम्राट था । वह हर्यक वंश का था। उसने अंग राज्य को जीतकर अपने साम्राज्य का विस्तार किया। यही विस्तार आगे चलकर मौर्य साम्राज्य के विस्तार का भी आधार बना।

                                               

बिहार का आधुनिक इतिहास

आधुनिक बिहार का संक्रमण काल १७०७ ई. से प्रारम्भ होता है। १७०७ ई. में औरंगजेब की मृत्यु के बाद राजकुमार अजीम-ए-शान बिहार का बादशाह बना। जब फर्रुखशियर १७१२-१९ ई. तक दिल्ली का बादशाह बना तब इस अवधि में बिहार में चार गवर्नर बने। १७३२ ई. में बिहार का ...

                                               

बिहार का प्राचीन इतिहास

प्राचीन बिहार के ऐतिहासिक स्रोतों से प्राप्त महत्वपूर्ण तथ्यों से स्पष्ट होता है कि यह राज्य पवित्र गंगा घाटी में स्थित भारत का उत्तरोत्तर क्षेत्र था जिसका प्राचीन इतिहास अत्यन्त गौरवमयी और वैभवशाली था। यहाँ ज्ञान, धर्म, अध्यात्म व सभ्यता-संस्कृत ...

                                               

बेदरा का युद्ध

1759 मे डच कम्पनी तथा इंग्लिश कम्पनी के बीच बंगाल के संशाध्नो की प्राप्ति हेतु हुआ था कम्पनी नवाब के पक्ष मे लड़ी थी डच हार गए तथा हमेशा के लिए भारत से चले गए बेदारा की लड़ाई बेदारा या बिदर्रा की लड़ाई नवम्बर, 1759 ई. में लड़ी गई थी। यह लड़ाई अंग ...

                                               

ब्रिटिश भारत के प्रेसीडेंसी और प्रांत

भारत के प्रांत, पूर्व में गुलाम भारत के प्रेसीडेंसी और इससे भी पहले प्रेसीडेंसी कस्बें, भारतीय उपमहाद्वीप में ब्रिटिश शासन के दौरान के प्रशासनिक प्रभाग थे। सामूहिक रूप से, उन्हें ब्रिटिश भारत कहा जाता था। एक या अन्य रूप में, इनका अस्तित्व 1612 से ...

                                               

ब्रिटिश भारत में रियासतें

ब्रिटिश भारत में रियासतें ब्रिटिश राज के दौरान अविभाजित भारत में नाममात्र के स्वायत्त राज्य थे। इन्हें आम बोलचाल की भाषा में "रियासत", "रजवाड़े" या व्यापक अर्थ में देशी रियासत कहते थे। ये ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा सीधे शासित नहीं थे बल्कि भारतीय श ...

                                               

ब्रिटिशकालीन भारत के रियासतों की सूची

सन १९४७ में स्वतंत्रता और विभाजन से पहले भारतवर्ष में ब्रिटिश शासित क्षेत्र के अलावा भी छोटे-बड़े कुल 565 स्वतन्त्र रियासत हुआ करते थे, जो ब्रिटिश भारत का हिस्सा नहीं थे। ये रियासतें भारतीय उपमहाद्वीप के वो क्षेत्र थे, जहाँ पर अंग्रेज़ों का प्रत् ...

                                               

भारत का आर्थिक इतिहास

भारत का आर्थिक विकास सिंधु घाटी सभ्यता से आरम्भ माना जाता है। सिंधु घाटी सभ्यता की अर्थव्यवस्था मुख्यतः व्यापापर आधारित प्रतीत होती है जो यातायात में प्रगति के आधापर समझी जा सकती है। लगभग 600 ई॰पू॰ महाजनपदों में विशेष रूप से चिह्नित सिक्कों को ढ़ ...

                                               

भारत का पौराणिक इतिहास

भारत का पौराणिक इतिहास सृष्टि के आरंभ से लेकर कलियुग में हुए राजाओं एवं मुगल शासन तक का इतिहास है जिसका वर्णन वेद व्यास रचित विभिन्न पुराणों, रामायण आदि ग्रंथों में किया गया है। काल को सत्ययुग, द्वापरयुग, त्रेतायुग और कलियुग सहित चार भागों में वि ...

                                               

भारत का लैंगिक इतिहास

सनातन धर्म में काम को चार पुरुषार्थों में स्थान प्राप्त है। सेक्स के इतिहास में भारत की भूमिका अति महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में ही पहले ऐसे ग्रन्थ की रचना हुई जिसमें संभोग को विज्ञान के रूप में देखा गया। यह भी कहा जा सकता है कि कला और साहित्य क ...

शब्दकोश

अनुवाद
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