ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 313


                                               

एलिस एक्का की कहानियां

एलिस एक्का की कहानियां हिंदी की पहली महिला आदिवासी कथाकार एलिस एक्का की कहानियों का एकमात्र संकलन है। एलिस एक्का की कहानियां हिंदी की पहली महिला आदिवासी कथाकार एलिस एक्का की कहानियों का एकमात्र संकलन है। हिंदी कथा साहित्य के ज्ञात इतिहास में एलिस ...

                                               

पगहा जोरी-जोरी रे घाटो

पगहा जोरी-जोरी रे घाटो 2011 में प्रकाशित सुख्यात हिंदी कथाकार रोज केरकेट्टा की कहानियों का पहला संग्रह है। वर्ष 2012 में ‘अयोध्या प्रसाद खत्री स्मृति सम्मान’ से पुरस्कृत इस कथा संग्रह में लेखिका ने आदिवासियों के उस भाव-संसार को बुना है जिसे बौद्ध ...

                                               

आदिवासी साहित्यकार

                                               

शेम (उपन्यास)

शेम अंग्रेजी साहित्यकार सलमान रश्दी द्वारा मिडनाइट्स चिल्ड्रेन के बाद लिखा गया तीसरा उपन्यास है। १९८३ में प्रकाशित यह उपन्यास उनकी अधिकांश रचनाओं की तरह ही जादुई यथार्थवाद की शैली में लिखा गया है। का प्रयोग किया गया है। इस में ज़ुल्फ़िकार अली भुट ...

                                               

सलमान रुश्दी

सर अहमद सलमान रुश्दी एक ब्रिटिश भारतीय उपन्यासकाऔर निबंधकार हैं। उन्होंने अपने दूसरे उपन्यास मिडनाइट्स चिल्ड्रन से प्रसिद्धि प्राप्त की, जिसे 1981 में बुकर पुरस्कार मिला। उनके अधिकांश प्रारंभिक उपन्यास भारतीय उप-महाद्वीप पर आधारित हैं। उनकी शैली ...

                                               

आल्हा

आल्हा मध्यभारत में स्थित ऐतिहासिक बुंदेलखण्ड के सेनापति थे और अपनी वीरता के लिए विख्यात थे। आल्हा के छोटे भाई का नाम ऊदल था और वह भी वीरता में अपने भाई से बढ़कर ही था। जगनेर के राजा जगनिक राव ने आल्ह-खण्ड नामक एक काव्य रचा था उसमें इन वीरों की 52 ...

                                               

पृथ्वीराज रासो

पृथ्वीराज रासो हिन्दी भाषा में लिखा एक महाकाव्य है जिसमें पृथ्वीराज चौहान के जीवन और चरित्र का वर्णन किया गया है। इसके रचयिता चंदबरदाईराव पृथ्वीराज के बचपन के मित्और उनके राजकवि थे और उनकी युद्ध यात्राओं के समय वीर रस की कविताओं से सेना को प्रोत् ...

                                               

पृथ्वीराज-रासो का काव्य सौन्दर्य

पृथ्वीराज-रासो का काव्य सौन्दर्य के सम्बन्ध में आज तक कोई ठोस विचार -विमर्श नहीं हुआ केवल रासो की ऐतिहासिकता पर ही विचार -विमर्श हुआ। रासो के सम्यक काव्यात्मक मूल्यांकन के लिए हमें निम्न शीर्षकों पर विचार करना होगा।

                                               

मनास की दास्तान

मनास की दास्तान मध्य एशिया के किरगिज़ लोगों की एक शौर्य काव्य-गाथा है। यह १८वीं सदी में लिखी गई थी लेकिन हो सकता है कि इसकी कहानी उस से पहले से प्रचलित हो। मनास किरगिज़ लोगों का एक ऐतिहासिक महानायक था। मनास कथा में उसे बहुत बहादुर बताया गया है और ...

                                               

अग्निरेखा

अग्निरेखा महादेवी वर्मा का अंतिम कविता संग्रह है जो मरणोपरांत १९९० में प्रकाशित हुआ। इसमें उनके अन्तिम दिनों में रची गयीं रचनाएँ संग्रहीत हैं जो पाठकों को अभिभूत भी करती हैं और आश्चर्यचकित भी, इस अर्थ में कि महादेवी के काव्य में ओत-प्रोत वेदना और ...

                                               

आत्मिका

आत्मिका महादेवी वर्मा का कविता-संग्रह है। आधुनिक हिन्दी कविता की मूर्धन्य कवियत्री श्रीमती महादेवी वर्मा के काव्य में एक मार्मिक संवेदना है। सरल-सुधरे प्रतीकों के माध्यम से अपने भावों को जिस ढंग से महादेवीजी अभिव्यक्त करती हैं, वह अन्यत्र दुर्लभ ...

                                               

दीपगीत

दीपगीत महादेवी वर्मा की दीपक संबंधी कविताओं का संग्रह है। दीप महादेवी जी का प्रिय प्रतीक है। डॉ शुभदा वांजपे के विचार से दीप महादेवी वर्मा का महत्त्वपूर्ण प्रतीक है, प्रो श्याम मिश्र महादेवी की कविता में दीपक को साधनारत आत्मा का प्रतीक मानते हैं ...

                                               

दीपशिखा (कविता-संग्रह)

दीपशिखा महादेवी वर्मा का पाँचवाँ कविता-संग्रह है। इसका प्रकाशन १९४२ में हुआ। इसमें १९३६ से १९४२ ई० तक के गीत हैं। इस संग्रह में १४७ पृष्ठ हैं और यह लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद द्वारा प्रकाशित किया गया है। इस संग्रह के गीतों का मुख्य प्रतिपाद्य स्व ...

                                               

नीरजा

नीरजा महादेवी वर्मा का तीसरा कविता-संग्रह है। इसका प्रकाशन १९३४ में हुआ। इसमें १९३१ से १९३४ तक की रचनाएँ हैं। नीरजा में रश्मि का चिन्तन और दर्शन अधिक स्पष्ट और प्रौढ़ होता है। कवयित्री सुख-दु:ख में समन्वय स्थापित करती हुई पीड़ा एवं वेदना में आनन् ...

                                               

नीलांबरा

                                               

नीहार

नीहार महादेवी वर्मा का पहला कविता-संग्रह है। इसका प्रथम संस्करण सन् १९३० ई० में गाँधी हिन्दी पुस्तक भण्डार, प्रयाग द्वारा प्रकाशित हुआ। इसकी भूमिका अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध ने लिखी थी। इस संग्रह में महादेवी वर्मा की १९२३ ई० से लेकर १९२९ ई० तक क ...

                                               

अधर के द्वार पर

                                               

परिक्रमा (महादेवी वर्मा)

                                               

प्रथम आयाम

                                               

मंतलु मानवुडु

मंतलु मानवुडु तेलुगू भाषा के विख्यात साहित्यकार सी. नारायण रेड्डी द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1973 में तेलुगू भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

यामा

यामा एक कविता-संग्रह है जिसकी रचायिता महादेवी वर्मा हैं। इसमें उनके चार कविता संग्रह नीहार, नीरजा, रश्मि और सांध्यगीत संकलित किगए हैं। इस कृति को सन् 1982 में हिंदी साहित्य का सर्वोच्च पुरस्कार ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

                                               

रश्मि (कविता-संग्रह)

रश्मि महादेवी वर्मा का दूसरा कविता संग्रह है। इसका प्रकाशन १९३२ में हुआ। इसमें १९२७ से १९३१ तक की रचनाओं का संग्रह किया गया हैं। इसमें महादेवी जी का चिंतन और दर्शन पक्ष मुखर होता प्रतीत होता है।

                                               

सन्धिनी

सन्धिनी महादेवी वर्मा की चुनी हुई ६५ कविताओं का संग्रह है, जो १९६४ में प्रकाशित हुआ। इस पुस्तक से परिचय करवाते हुए वे कहती हैं, "‘सन्धिनी’ में मेरे कुछ गीत संग्रहीत हैं। काल-प्रवाह का वर्षों में फैला हुआ चौड़ा पाट उन्हें एक-दूसरे से दूऔर दूरतम की ...

                                               

सप्तपर्णा

                                               

सांध्यगीत (कविता-संग्रह)

सांध्यगीत महादेवी वर्मा का चौथा कविता संग्रह हैं। इसमें 1934 से 1936 ई० तक के रचित गीत हैं। 1936 में प्रकाशित इस कविता संग्रह के गीतों में नीरजा के भावों का परिपक्व रूप मिलता है। यहाँ न केवल सुख-दुख का बल्कि आँसू और वेदना, मिलन और विरह, आशा और नि ...

                                               

साथ हो तुम

साथ हो तुम, वर्ष 2015 में प्रकाशित पुस्तक हिन्दी के सुप्रसिद्ध कवि राजगोपाल सिंह का अंतिम काव्य संग्रह है। यह उनकी मुत्यु के पश्चात प्रकाशित हुआ। पाँखी प्रकाशन, दिल्ली से प्रकाशित इस संग्रह में कवि की ग़ज़लें, गीत, कविताएँ तथा दोहे आदि अनेक विधाए ...

                                               

सीर रो घर

सीर रो घर राजस्थानी भाषा के विख्यात साहित्यकार वासु आचार्य द्वारा रचित एक कविता–संग्रह है जिसके लिये उन्हें सन् 1999 में राजस्थानी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

कहानी

कहानी हिन्दी में गद्य लेखन की एक विधा है। उन्नीसवीं सदी में गद्य में एक नई विधा का विकास हुआ जिसे कहानी के नाम से जाना गया। बंगला में इसे गल्प कहा जाता है। कहानी ने अंग्रेजी से हिंदी तक की यात्रा बंगला के माध्यम से की। कहानी गद्य कथा साहित्य का ए ...

                                               

कहानी के तत्व

                                               

गुलकी बन्नो

यह एक ऐसी कुबड़ी गुलकी की कहानी है जो कि घेघा बुआ के चौतरे पर बैठकर तरकारियाँ बेचकर अपना गुजर-बसर स्वयं करती है। उसके पिता की मृत्यु के पश्चात् से वह अकेली ही रहती है। उसके पति मनसेधू ने उसे छोड़कर दूसरा ब्याह कर लिया। वास्तव में गुलकी का कूबड़ उ ...

                                               

टोबा टेक सिंह (कहानी)

टोबा टेक सिंह सादत हसन मंटो द्वारा लिखी गई और १९५५ में प्रकाशित हुई एक प्रसिद्ध लघु कथा है। यह भारत के विभाजन के समय लाहौर के एक पागलख़ाने के पागलों पर आधारित है और समीक्षकों ने इस कथा को पिछले ५० सालों से सराहते हुए भारत-पाकिस्तान सम्बन्धों पर ए ...

                                               

द लास्ट लीफ

"द लास्ट लीफ" ओ हेनरी द्वारा रचित एक लघु कथा है। ग्रीनविच गाँव में में रहने वाले पात्रों और विषयों के बारे में इसमें बताया जाता है जैसा ओ हेनरी की कृतियों में पाया जाता है।

                                               

दुनिया का सबसे अनमोल रतन

दुनिया का सबसे अनमोल रतन प्रेमचंद की पहली कहानी थी। यह कहानी कानपुर से प्रकाशित होने वाली उर्दू पत्रिका ज़माना में १९०७ में प्रकाशित हुई थी। यह प्रेमचंद के कहानी संग्रह सोज़े वतन में संकलित है।

                                               

यूनान की पौराणिक कथा

ग्रीक पौराणिक कथाओं मिथकों का शरीर है और किंवदंतियों प्राचीन उनके देवताओं और नायक, दुनिया की प्रकृति के विषय में यूनानी और मूल और अपने स्वयं के पंथ और पूजा पद्धतियों के महत्व से संबंधित. वे प्राचीन ग्रीस में धर्म का एक हिस्सा थे। आधुनिक विद्वानों ...

                                               

सांसारिक प्रेम और देश-प्रेम

सांसारिक प्रेम और देश-प्रेम प्रेमचंद की पहली प्रकाशित कहानी है। इसका प्रकाशन कानपूर से निकलने वाली उर्दू पत्रिका ज़माना के अप्रैल १९०८ के अंक में हुआ था। आम तौर से प्रेमचंद के पहले कहानी संग्रह सोज़ेवतन में प्रकाशित दुनिया का सबसे अनमोल रतन को उन ...

                                               

सिंहासन बत्तीसी

सिंहासन बत्तीसी एक लोककथा संग्रह है। प्रजावत्सल, जननायक, प्रयोगवादी एवं दूरदर्शी महाराजा विक्रमादित्य भारतीय लोककथाओं के एक बहुत ही चर्चित पात्र रहे हैं। प्राचीनकाल से ही उनके गुणों पर प्रकाश डालने वाली कथाओं की बहुत ही समृद्ध परम्परा रही है। सिं ...

                                               

हितोपदेश

हितोपदेश भारतीय जन-मानस तथा परिवेश से प्रभावित उपदेशात्मक कथाएँ हैं। हितोपदेश की कथाएँ अत्यन्त सरल व सुग्राह्य हैं। विभिन्न पशु-पक्षियों पर आधारित कहानियाँ इसकी खास विशेषता हैं। रचयिता ने इन पशु-पक्षियों के माध्यम से कथाशिल्प की रचना की है जिसकी ...

                                               

हिन्दी कहानी

हिंदी कहानियों का इतिहास भारत में सदियो पुराना है। प्राचीन काल से ही कहानियां भारत में बोली, सुनी और लिखी जा रही है। ये कहानियां ही है जो हमें हिम्मत से भर देती है और हम असंभव कार्य को भी करने को तैयार हो जाते है और अत्यंत कठिनाइयों के बावजूद ज्य ...

                                               

अंग्रेज़ी कथाएँ

                                               

किंवदंती

                                               

परी कथाएँ

                                               

शैलेश मटियानी की कहानी

                                               

शैलेष मटियानी की कहानी

                                               

दास्तान एक जंगली राज की

आजादी के बाद की पंजाब की सबसे प्रसिद्ध साहित्यकारों में से एक अजीत कौर की किताब घर से प्रकाशइत इस कहानि संग्रह में कुल 15 कहानियाँ हैं। इसमें वर्तमान समय और समाज पर सटीक टीकाएँ हैं। इनमें बेकसूर लोगों के कत्ल के साथ ही पेड़ों के कटने और पंछियों क ...

                                               

आलिफ़ लैला

                                               

गुरबचन सिंह भुल्लर

गुरबचन सिंह भुल्लर पंजाबी भाषा के नामवर कहानीकार हैं। उसने काविता, सफ़रनामा, अनुवाद, संपादन, पत्रकारिता, रेखाचित्र, आलोचना, बालसाहित्य आदि अनेक क्षेत्रों में साहित्य रचना की है। उसके कहानी-संग्रह अग्नि-कलश को साल 2005 में साहित्य अकादमी, दिल्ली क ...

                                               

ज्ञानरंजन

ज्ञानरंजन का जन्म 21 नवंबर 1936 को महाराष्ट्र के अकोला में हुआ था। बचपन और किशोरावस्था का अधिकांश समय अजमेर, दिल्ली एवं बनारस में बीता तथा उच्च शिक्षा इलाहाबाद में संपन्न हुई। लंबे समय से उनका स्थायी निवास मध्यप्रदेश के जबलपुर में है। आज भी उनका ...

                                               

शैलेश मटियानी

शैलेश मटियानी आधुनिक हिन्दी साहित्य-जगत् में नयी कहानी आन्दोलन के दौर के कहानीकार एवं प्रसिद्ध गद्यकार थे। उन्होंने बोरीवली से बोरीबन्दर तथा मुठभेड़, जैसे उपन्यास, चील, अर्धांगिनी जैसी कहानियों के साथ ही अनेक निबंध तथा प्रेरणादायक संस्मरण भी लिखे ...

                                               

हिन्दी कहावतें

                                               

अझ़दहा

अझ़दहा, अज़दहा, अजदहा या ड्रैगन एक काल्पनिक जीव है जिसमें सर्प की प्रकृति के बहुत से तत्व थे और कुछ संस्कृतियों में उड़ने और मुंह से आग उगलने की क्षमता भी थी। यह दुनिया की कई संस्कृतियों के मिथकों में पाया जाता है। कभी-कभी इस जीव को अजगर भी बुलाय ...

शब्दकोश

अनुवाद
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