ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 142


                                               

शिव ताण्डव स्तोत्र

शिव ताण्डव स्तोत्र महान विद्वान एवं परम शिवभक्त लंकाधिपति रावण द्वारा विरचित भगवान शिव का स्तोत्र है। गिमाशुतनान्थगतिंमोहन ि दहिनांुशंक् ितनम् ॥६शिवस्तोतर पढ़ने सनने तर ाणी पि्र हो त है विव ो स्थापितहो जाता ैऔर सारे भ्रमी ूर ह ज

                                               

श्री गायत्री सहस्रनामस्तोत्र

॥ श्रीगायत्रीसहस्रनामस्तोत्रम् ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ध्यानम् रक्तश्वेतहिरण्यनीलधवलैर्युक्तां त्रिनेत्रोज्ज्वलां रक्तारक्तनवस्रजं मणिगणैर्युक्तां कुमारीमिमाम् । गायत्री कमलासनां करतलव्यानद्धकुण्डाम्बुजां पद्माक्षीं च वरस्रजञ्च दधतीं हंसाधिरूढां भजे ॥ ...

                                               

श्रीत्रिपुराम्बाशाम्भवीमहाप्रपत्ति

श्रीत्रिपुराम्बाशाम्भवीमहाप्रपत्ति देवी त्रिपुरसुन्दरी एवं श्री विद्या की उपासना से सम्बन्धित एक संस्कृत लघुकाव्य है। त्रिपुरसुन्दरी को परा शक्ति, ललिता, पराम्बा, श्रीदेवी आदि के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू धर्म में श्रीविद्या की उपासना भोग और ...

                                               

श्रीभगवतीस्तोत्रम्

श्रीभगवतीस्तोत्रम शक्ति रूपेण देवी भगवती दुर्गा की स्तुति में कहा गया स्तोत्र है। इसके अनेक उवाच हैं, जो कि निम्नलिखित हैं। यह एक धार्मिक पाठ है जिसकी रचना व्यास मुनि ने की थी। ऐसा माना जाता है कि जो पवित्र भाव से नियमपूर्वक इस व्यासकृत स्तोत्र क ...

                                               

श्रीमृत्युञ्जयस्तोत्रम् (मार्कण्डेयकृत)

श्री मृत्युंजय स्तोत्र महर्षि मार्कण्डेय द्वारा भगवान की स्तुति में रचा गया है। मार्कण्डेय अल्पायु थे, दीर्घ आयु हेतु उन्होंने भगवान शिव की आराधना की। मुत्यु के समय भगवान शिव के आशीर्वाद से काल को वापस लौटना पड़ा एवं शिव ने मार्कण्डेय को दीर्घायु ...

                                               

श्रीरामरक्षास्तोत्रम्

श्रीरामरक्षास्तोत्रम् बुधकौशिक नामक ऋषि द्वारा भगवान श्रीराम की स्तुति में रचा गया स्तोत्र है। ॥ श्रीरामरक्षास्तोत्रम् ॥ ॥ श्रीगणेशायनम: ॥ ॥ विनियोग ॥ अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य। बुधकौशिक ऋषि:। श्रीसीतारामचंद्रोदेवता। अनुष्टुप् छन्द:। सीता ...

                                               

स्तोत्र

संस्कृत साहित्य में किसी देवी-देवता की स्तुति में लिखे गये काव्य को स्तोत्र कहा जाता है । संस्कृत साहित्य में यह स्तोत्रकाव्य के अन्तर्गत आता है। महाकवि कालिदास के अनुसार स्तोत्रं कस्य न तुष्टये अर्थात् विश्व में ऐसा कोई भी प्राणी नहीं है जो स्तु ...

                                               

दीर्घकालिक स्मृति

दीर्घकालिक स्मृति एक प्रकार की स्मृति है जो लम्बे समय तक स्मृति को सहेजे रखती है। यदि आप कुछ वर्षो या महीनों की कोई भी स्मृति याद रखते हैं या कोई बड़ी जानकारी तो वह सभी दीर्घकालिक स्मृति में आती है। यह लम्बे समय तक अनगिनत जानकारी याद रख सकती है।

                                               

धर्मशास्त्र

धर्मशास्त्र संस्कृत ग्रन्थों का एक वर्ग है, जो कि शास्त्र का ही एक प्रकार है। इसमें सभी स्मृतियाँ सम्मिलित हैं। यह वह शास्त्र है जो हिन्दुओं के धर्म का ज्ञान सम्मिलित किये हुए हैं, धर्म शब्द में यहाँ पारंपरिक अर्थ में धर्म तथा साथ ही कानूनी कर्तव ...

                                               

धर्मसूत्र

धर्मसूत्रों में वर्णाश्रम-धर्म, व्यक्तिगत आचरण, राजा एवं प्रजा के कर्त्तव्य आदि का विधान है। ये गृह्यसूत्रों की शृंखला के रूप में ही उपलब्ध होते हैं। श्रौतसूत्रों के समान ही, माना जाता है कि प्रत्येक शाखा के धर्मसूत्र भी पृथक्-पृथक् थे। वर्तमान स ...

                                               

निमोनिक

न्यूमोनिएक ऐसा जुगाड़ है चीजों को आसानी से याद रखने में सहायक होता है। ये प्राय: छोटी कविता, छोटे वाक्य या छोटे से सरल शब्द के रूप में होती हैं जिसके शब्द या अक्षरों से याद किये जाने वाले चीज का सीधा सम्बन्ध होता है। इन्हें किसी भी भाषा में बनाया ...

                                               

मांसपेशीय स्मृति

मांसपेशीय स्मृति किसी कार्य को मांसपेशी की सहायता से कई बार लगातार करने पर उस मांसपेशी को वह कार्य याद रहता है और हम उस कार्य को जल्दी कर पाते हैं। यदि कोई भी कार्य हम लंबे समय तक करते हैं, तो उस कार्य को करने के लिए हमें अधिक सोचने की आवश्यकता न ...

                                               

लघु अवधि स्मृति

लघु अवधि स्मृति जिसे मुख्य या सक्रिय स्मृति भी कहा जाता है। यह कुछ समाय के लिए जानकारी को याद रखता है। उसके कुछ समय के पश्चात यह स्मृति में नहीं रहता है। उदाहरण के लिए यदि 4 + 5 या 6 - 3 आदि संख्या को जोड़ना या घटाना करते समय हम मन में ही इन संख् ...

                                               

संवेदी स्मृति

संवेदी स्मृति एक प्रकार की अवास्तविक स्मृति होती है, यह भ्रम कई बार आंखों के द्वारा दिये गए संकेत का दिमाग में बनने वाली छवि के कारण होता है। जब भी हम कोई गतिशील वस्तु को देखते हैं तो आँख दिमाग को उस छवि का संकेतों के रूप में भेजता है, परन्तु वस् ...

                                               

सक्रिय स्मृति

सक्रिय स्मृति किसी भी कार्य को सीखते समय सक्रिय रहती है। यदि हम कोई भी लेख पढ़ते हैं या कुछ भी देखते हैं तो यह स्मृति ही सक्रिय रहती है। उदाहरण के लिए यदि हम किसी वस्तु के बारे में पढ़ रहे हैं और हमे उससे ही जुड़ा कोई सवाल पूछा जाता है तो इस सवाल ...

                                               

स्मृतिदोष

                                               

अक्षरधाम मंदिर, गांधीनगर

                                               

वचनामृत

                                               

शिक्षापत्री

शिक्षापत्री स्वामीनारायण संप्रदाय का मूल ग्रन्थ है। www.googleboy.net यह संस्कृत में है और इसमें २१२ श्लोक हैं। इसकी रचनाकार भगवान स्वामीनारायण हैं। इसकी रचना वड़ताल में ११ फ़रवरी १८२६ को की गयी।

                                               

स्वामिनारायण मत

                                               

विश्व हिंदू परिषद नेपाल

विश्व हिंदू परिषद नेपाल एक हिन्दु संगठन है, जो हिन्दु स्यमसेवक संघ यानी एचएसएस की एक अनुषांगिक शाखा है। इसे वीएचपी नेपाल और विहिप नेपाल के नाम से भी जाना जाता है। विहिप का चिन्ह बरगद का पेड़ है और इसका नारा, "धर्मो रक्षति रक्षित:" यानी जो धर्म की ...

                                               

माता अमृतानंदमयी

माता अमृतानंदमयी देवी एक हिन्दू आध्यात्मिक नेत्री व गुरु हैं, जिन्हें उनके अनुयायी संत के रूप में सम्मान देते हैं और अम्मा ", "अम्माची" या "मां" के नाम से भी जानते हैं। उनकी मानवतावादी गतिविधियों के लिए उन्हें व्यापक स्तर पर सम्मान प्राप्त है। कभ ...

                                               

देवरहा बाबा

देवरहा बाबा, भारत के उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में एक योगी, सिद्ध महापुरुष एवं सन्तपुरुष थे। डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद, महामना मदन मोहन मालवीय, पुरुषोत्तमदास टंडन, जैसी विभूतियों ने पूज्य देवरहा बाबा के समय-समय पर दर्शन कर अपने को कृतार्थ अनुभव किय ...

                                               

पोतुलूरी वीरब्रह्मेंद्र

पुतुल्य वीरब्रह्मणंद स्वामी एक हिंदू ऋषि और दैवज्ञ थे। उन्हें भविष्य के बारे में भविष्यवाणियों की पुस्तक, कलौना के लेखक माना जाता है। उनके भविष्यद्वाणी के ग्रंथों को गोविंदा वक्य के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने जीविका बोध भी लिखा। वीरब्रह्मचं ...

                                               

राघवेंद्र तीर्थ

श्री राघवेंद्र एक हिंदू विद्वान, धर्मशास्त्री और संत थे। उन्हें सुधा परिमलचार्य के रूप में भी जाना जाता था। उनके विविध कृतियों में माधव, जयतीर्थ और व्यासतीर्थ के कार्यों पर टिप्पणी, द्वैत के दृष्टिकोण से प्रधान उपनिषदों की व्याख्या और पूर्वा मीमा ...

                                               

शूद्र वर्ण के हिन्दू सन्त

बहुत से प्रसिद्ध हिन्दू सन्त मूलतः शूद्और वैश्य वर्ण के थे। उन्होने अपने ज्ञान तथा ईश्वर भक्ति से समाज में पूजनीय स्थान प्राप्त किया। हिन्दू समाज के सभी वर्गों के लोगों ने उन्हें सम्मान दिया और उनके उपदेशों तथा शिक्षाओं को अंगीकार किया। नीचे दी ग ...

                                               

संत

हिन्दू धर्म तथा अन्य भारतीय धर्मों में सन्त उस व्यक्ति को कहते हैं जो सत्य आचरण करता है तथा आत्मज्ञानी है, जैसे संत शिरोमणि गुरु रविदास, सन्त कबीरदास, संत तुलसी दास गुरू घासीदास। सन्त शब्द सत् शब्द के कर्ताकारक का बहुवचन है। इसका अर्थ है - साधु, ...

                                               

कृष्ण पक्ष

                                               

चतुर्युगी

चतुर्युगी हिन्दू समय मापन के अनुसार समय की वृहत इकाई है। इसका परिमाण १२००० मानव वर्ष होता है। देवताओं की काल गणना 30 दिव्य दिवस = 1 दिव्य मास दिव्य जीवन काल = 100 दिव्य वर्ष= 36000 मानव वर्ष 12 दिव्य मास = 1 दिव्य वर्ष 1 मानव वर्ष = एक दिव्य दिवस ...

                                               

दिव्य वर्ष

यह हिन्दू समय मापन इकाई है। यह इकाई विराट श्रेणी की है। एक दिव्य वर्ष 360 मानव वर्षों के बराबर होता है। देवताओं की काल गणना 30 दिव्य दिवस = 1 दिव्य मास 1 मानव वर्ष = एक दिव्य दिवस दिव्य जीवन काल = 100 दिव्य वर्ष= 36000 मानव वर्ष 12 दिव्य मास = 1 ...

                                               

द्वापर युग

द्वापर मानवकाल के तृतीय युग को कहते हैं। यह काल कृष्ण के देहान्त से समाप्त होता है। ब्रह्मा का एक दिवस 10.000 भागों में बंटा होता है, जिसे चरण कहते हैं: यह चक्र ऐसे दोहराता रहता है, कि ब्रह्मा के एक दिवस में 1000 महायुग हो जाते हैं

                                               

पक्ष

पक्ष अथवा पखवाड़ा सामान्य व्यवहार में 15 दिनों के अंतराल को कहा जाता है। सुविधानुसार आधा महीना या दो सप्ताह के समय को भी एसा कह दिया जाता है। हालाँकि ज्योतिष शास्त्र, भारतीय पंचांग या काल गणना की हिन्दू पद्धति के अनुसार तकनीकी रूप से पक्ष की परिभ ...

                                               

शुक्ल पक्ष

                                               

पंचांग

                                               

मास

                                               

संवत

                                               

सप्तर्षि संवत

                                               

हिन्दू कैलेंडर

                                               

आर्जव

आर्जव दस यमों में से एक है। प्राचीन हिन्दू और जैन ग्रन्थों में इसका वर्णन मिलता है। इसका शाब्दिक अर्थ इमानदारी, सीधापन, और कथनी-और करनी में एकरूपता से है।

                                               

कौलाचार

कौलों के आचार-विचार तथा अनुष्ठान प्रकार को कौलाचार के नाम से जाना जाता है। शाक्तमत के अनुसार साधनाक्षेत्र में तीन भावों तथा सात आचारों की विशिष्ट स्थिति होती है- पशुभाव, वीरभाव और दिव्यभाव। ये तो तीन भावों के संकेत हैं। वेदाचार, वैष्णवाचार, शैवाच ...

                                               

न्यायामृत

                                               

पुरुष (हिन्दू सिद्धांत)

पुरुष शब्द का प्रयोग वैदिक साहित्य में कई जगह मिलता है। जीवात्मा को कपिल मुनि कृत सांख्य शास्त्र में पुरुष कहा गया है - ध्यान दीजिये इसमें यह लिंग द्योतक न होकर आत्मा द्योतक है। वेदों में नर के लिए पुम् मूलों का इस्तेमाल मिलता है। इसके अलावे बृहद ...

                                               

रजस्

सांख्य दर्शन में सत्त्व, रजस् और तमस - ये तीन गुण बताये गये हैं। इनमें रजस् मध्यम स्वभाव है जिसके प्रधान होने पर व्यक्ति यथार्थ जानता तो है पर लौकिक सुखों की इच्छा के कारण उपयुक्त समय उपयुक्त कार्य नहीं कर पाता है। उदाहरणार्थ किसी व्यक्ति को पता ...

                                               

राजधर्म

राजधर्म का अर्थ है - राजा का धर्म या राजा का कर्तव्य। राजवर्ग को देश का संचालन कैसे करना है, इस विद्या का नाम ही राजधर्म है। राजधर्म की शिक्षा के मूल वेद हैं। मनुस्मृति, शुक्रनीति, महाभारत के विदुर प्रजागर तथा शान्तिपर्व तथा चाणक्य द्वारा रचित प् ...

                                               

विदेह कैवल्य

विदेह कैवल्य को विदेहमुक्ति या जीवन्मुक्ति भी कहा है। जीवन्मुक्त का अर्थ है जिसने इसी जीवन में मुक्ति प्राप्त की हो। वेदान्त दर्शन के अनुसार यथार्थत: आत्मा और ब्रह्म में कोई अंतर नहीं है। ब्रह्म के साक्षात्कार से आत्मा परब्रह्म में सम्यक् रूप से ...

                                               

वैशेषिकसूत्र

वैशेषिकसूत्र कणाद मुनि द्वारा रचित वैशेषिक दर्शन का मुख्य ग्रन्थ है। इस पर अनेक टीकाएं लिखी गयीं जिसमें प्रशस्तपाद द्वारा रचित पदार्थधर्मसंग्रह प्रसिद्ध है।

                                               

संकल्प (संस्कृत)

सङ्कल्प का अर्थ है कार्य करने की वह इच्छा जो मन में उत्पन्न हो, अर्थात् विचार या इरादा । दान, पुण्य या और कोई देवकार्य आरम्भ करने से पहले एक निश्चित मन्त्र का उच्चारण करते हुए अपना दृढ़ निश्चय या विचार प्रकट करना भी संकल कहलाता है। इस मंत्र में प ...

                                               

संस्कार

संस्कार शब्द का मूल अर्थ है, शुद्धीकरण। मूलतः संस्कार का अभिप्राय उन धार्मिक कृत्यों से था जो किसी व्यक्ति को अपने समुदाय का पूर्ण रुप से योग्य सदस्य बनाने के उद्देश्य से उसके शरीर, मन और मस्तिष्क को पवित्र करने के लिए किए जाते थे, किन्तु हिंदू स ...

                                               

सूक्ष्म शरीर

सुक्ष्म शरीर को अन्तवाहक या मनमय शरीर भी कहा जाता है। मनुष्य की मृत्यु हो जाने के बाद भी इस शरीर का नाश नहीं होता। अन्तवाहक शरीर का गति अत्यंत तेज होता है ये शरीर सेकेंडों में कहीं भी जा सकता है। इस अन्तवाहक शरीर को बाहर निकालने का दो साधना है । ...

                                               

हरिहर

हिन्दू धर्म में, विष्णु तथा शिव का सम्मिलित रूप हरिहर कहलाता है। इनको शंकरनारायण तथा शिवकेशव भी कहते हैं। विष्णु तथा शिव दोनों का सम्मिलित रूप होने के कारण हरिहर वैष्णव तथा शैव दोनों के लिये पूज्य हैं। कई विद्वान शिव और विष्णु को अलग मानते हैं। ढ ...

शब्दकोश

अनुवाद
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