ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 125


                                               

अरब विद्रोह

अरब विद्रोह शरीफ हुसैन बिन अली द्वारा शुरू किया गया था. तुर्क से स्वतंत्रता, और सीरिया के अलेप्पो से यमन के अदन अप करने के लिए एक विस्तृत श्रृंखला के एक अरब राज्य के गठन, इस विद्रोह था उद्देश्य पर.

                                               

अल महदी अल विल्लाह

अबु अब्दुल्ला मोहम्मद इब्ने अब्दुल्ला अल मसूंर के तीसरे खलीफा थे। उनका जन्म इस्वीसन 744 और 745 के बिच और मृत्यु 24 जूलाई 785 के दिन हुआ था। 6 अक्टूबर 775 से 24 जूलाई 785 तक उनका शासनकाल रहा। उनके पूर्वाधिकारी अल मंसूऔर उत्तराधिकारी अल हादी थे।

                                               

अल मुराह

अल मुराह एक महान अरब जनजाति जो प्रसिद्ध बानू याम जनजाति से निकली है। अल मुराह के सदस्यों ने "अल मरी" के साथ अपने नाम समाप्त किए, अरबी उच्चारण के अनुरूप "अल माररी" भी लिखा। वे यमन के कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन और वादी अमाद जैस ...

                                               

अल रादी

अबू अल अब्बास इब्ने जफर अल मूकतादीर: Abu l-Abbas Muhammad ibn Jafar al-Muqtadir अरबी: أبو العباس محمد بن جعفر المقتدر ‎ ‏दिसम्बर 909 – 23 दिसम्बर 940 ईस्वी, सधारण नाम अल रादी विल्लाह (अरबी: الراضي بالله ‎, ‏‎ अब्बासी खिलाखफत का बीसवा खलीफा था।

                                               

अल हादी

अवू मूहम्मद मूसा इब्ने महदी अल हादी: Abu Muhammad Musa ibn Mahdi al-Hadi ‏‎अब्बासी ख़िलाफ़त के चार वे खलीफा थे इनकी मृत्यु के बाद हारुन अल रशीद खलीफा वने।

                                               

अल हामिरी

अल हामिरी का नाआम तौपर अल बु हामिर के सदस्यों द्वारा किया जाता है, जो अबू धाबी के अमीरात में अल ऐन क्षेत्र के एक छोटे सी जनजाति हैं। वे छोटे हैं अल बु शार से जनसिर जनजाति का खंड। इसके अलावा, वे बड़े बानी यास जनजातीय संघ का हिस्सा हैं, जो अबू धाबी ...

                                               

अल-कासिमी

अल-कासिमी शाही परिवार संयुक्त अरब अमीरात के छह शासक परिवारों में से एक हैं। सात अमीरात में से दो अमीरात शारजाह और रस अल खैमा पर शासन करते हैं।

                                               

अल-शमसी

अल-शमसी एक अरब बद्दू जनजाति है जो ज्यादातर अरब प्रायद्वीप" के दक्षिणी हिस्से में निवास है। वे मुख्य रूप से उत्तरी ओमान, संयुक्त अरब अमीरात में स्थित हैं, और कुछ हद तक कुवैत, कतर, पूर्वी सऊदी अरब और बहरीन है। आज वास्तव में कई शाखाएंँ हैं जो स्वयं ...

                                               

आल बिन अली

आल बिन अली अरब राज्यों में विशेष रूप से बहरीन, कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत में स्थित एक सुन्नी अरब उप-जनजातीय संघ है। आल बिन अली अल उतबी जनजाति, मूल यूतयूब के वंशज हैं जिन्होंने बहरीन पर विजय प्राप्त की। आल बिन अली ...

                                               

इस्लाम से पहले का अरब

इस्लाम से पहले का अरब ६३० ईसवी के दशक में इस्लाम के उभरने से पहले के काल का अरबी प्रायद्वीप था। यदि इराक़ में केन्द्रित मेसोपोटामिया की सभ्यताओं को छोड़ा जाए तो अरबी प्रायद्वीप में सबसे पहली मानवीय संस्कृति २५०० ईसापूर्व के आसपास की उम्म अन-नार स ...

                                               

ईरान में इस्लाम

फारस की इस्लामी विजय ने सासैनियन साम्राज्य के अंत और फारस में पारिवारिक धर्म की अंतिम गिरावट का नेतृत्व किया। हालांकि, पिछली फारसी सभ्यताओं की उपलब्धियां खो गईं, लेकिन नई इस्लामी राजनीति द्वारा काफी हद तक अवशोषित हुईं। तब से इस्लाम ईरान का आधिकार ...

                                               

उमय्यद

उमाविया शासक इस्लाम के मुखिया, यानि ख़लीफ़ा, सन् 661 से सन् 750 तक रहे। प्रथम चार ख़लीफ़ाओं के बाद वे सत्ता में आए और इसके बाद ख़िलाफ़त वंशानुगत हो गई। उनके शासन काल में इस्लामिक सेना को सैनिक सफलता बहुत मिली और वे उत्तरी अफ़्रीका होते हुए स्पेन ...

                                               

उमर

हजरत उमर इब्न अल-ख़त्ताब, ई. मुहम्मद साहब के प्रमुख चार सहाबा में से थे। वो हज़रत अबु बक्र के बाद मुसलमानों के दूसरे ख़लीफ़ा चुने गये। मुहम्मद साहब ने फारूक नाम की उपाधि दी थी। जिसका अर्थ सत्य और असत्य में फर्क करने वाला। मुहम्मद साहब के अनुयाईयो ...

                                               

क़ुरैश क़बीला

क़ुरैश एक शक्तिशाली व्यापारी अरब क़बीला था जिसका इस्लाम के आने से पहले मक्का और उसके काबा पर नियंत्रण था। पैग़म्बर मुहम्मद​ भी इसी क़बीले की बनू हाशिम शाखा के सदस्य थे। पारम्परिक क़हतानी-अदनानी अरब श्रेणीकरण के नज़रिए से क़ुरैश एक अदनानी क़बीला था।

                                               

बद्र की लड़ाई

बद्र की लड़ाई सन् 624 में नवोदित मुस्लिम गुट और मक्का के क़ुरैश क़बीले की सेना के बीच आधुनिक सउदी अरब के हिजाज़ क्षेत्र में 13 मार्च को लड़ा गया था। इसका उद्देश्य एक तिजारती काफिले के हमले का बदला लेना था। इसमें मुस्लिम सेनाओं के नेतृत्व पैग़म्बर ...

                                               

बनी खालिद

बनी खालिद या अल-खल्दी परिवार, एक अरब जनजातीय संघ है। इस जनजाति ने 15 वीं शताब्दी से 18 वीं तक इराक और पूर्वी सऊदी अरब के दक्षिणी क्षेत्पर शासन किया था। और फिर 1 9वीं शताब्दी की शुरुआत में तुर्क साम्राज्य के अनुदान के तहत। इसकी सबसे बड़ी सीमा पर, ...

                                               

बनी मालिक

बनी मालिक या बानु मलिक अरब प्रायद्वीप की प्रमुख अरब जनजातियों में से एक हैं। वे मलिक अल-अशतर अल-नख के वंशज हैं।

                                               

बनी शाबा

बनी शाबा या शाबा के पुत्र एक अरबी जनजाति हैं जो काबा की चाबियाँ रखती हैं। जनजाति के सदस्य सफाई समारोह के दौरान काबा में आगंतुकों को बधाई देते हैं और आगंतुकों के साथ इंटीरियर को साफ करते हैं। शेख अब्दुल-अज़ीज़ अल-शीबी जिनकी नवंबर 2010 में मृत्यु ह ...

                                               

बनी हस्सान

बनी हस्सान अरबी मूल का एक समूह है, जो माकिल अरब जनजातियों की चार उप-जनजातियों में से एक है, जो 11 वीं शताब्दी में बनी हिलाल और बानु सुलेम जनजातियों के साथ मगरेब में आए थे।. 17 वीं शताब्दी के चार बोबा युद्ध के बाद बेनी हसन और अन्य योद्धा अरब जनजात ...

                                               

बनी हैरथ

बनी हैरथ सऊदी अरब में ताइफ के आसपास रहने वाले अदानी अरब जनजातियों में से एक है। जनजाति क्षेत्र के सबसे बड़े जनजातियों में से एक है और सऊदी अरब में ताइफ और अल कुनफुधाह के बीच का क्षेत्रफल रखती है।

                                               

बनू खुजाह

बनू खुजाह एक अरब, कानाइट जनजाति का नाम है, जो अरब प्रायद्वीप के मुख्य पैतृक जनजातियों में से एक है। उन्होंने लंबी अवधि के लिए मक्का पर शासन किया, और अधिकांश जनजाति अब अन्य देशों, मुख्य रूप से इज़राइल, फिलीस्तीनी प्रदेशों, इराक और जॉर्डन में कम सं ...

                                               

बनू तमीम

बनू तमीम जनजाति या बनी तामीम अरब की मुख्य जनजातियों में से एक है। वर्तमान समय में इस जनजाति के वंशज अरब प्रायद्वीप और सऊदी अरब जैसे पड़ोसी देशों में बसे हैं। उनमें इराक, कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं। अरबी में त ...

                                               

बनू मख़ज़ूम

बनू मख़ज़ूम अरब इतिहास में शक्तिशाली क़ुरैश नामक व्यापारी अरब क़बीले की एक शाखा थी। इसके वंशज आज भी सउदी अरब में मिलते हैं। पारम्परिक क़हतानी-अदनानी अरब श्रेणीकरण के नज़रिए से क़ुरैश और उसकी बनू मख़ज़ूम शाखा दोनो अदनानी क़बीले थे।

                                               

बनू सक़ीफ़

बनू सक़ीफ़ या बनू थ़क़ीफ़​ पैग़म्बर मुहम्मद के काल में एक अरबी क़बीला था। यह ताइफ़ शहर का मुख्य क़बीला था और इसके वंशज अब सउदी अरब, सीरिया, लेबनान, मिस्र, जॉर्डन, इराक़ और तुनीसिया जैसे कई देशों में बसे हुए हैं। अक्सर इनके नाम में सक़ाफ़ी नाम जुड ...

                                               

बनू हाशिम

बनू हाशिम एक अरबी क़बीला है जो बड़े क़ुरैश क़बीले की एक उपशाखा है। इसका नाम पैग़म्बर मुहम्मद के पर-दादा हाशिम पर रखा गया है और इसके सदस्य अपने-आप को उनका वंशज मानते हैं। अरबी भाषा में बनू का मतलब बेटे होता है और बनू हाशिम का मतलब हाशिम के बेटे है ...

                                               

बनू हुधयल

बनू हुधयल हिजाज में पश्चिमी सऊदी अरब की अदनानी जनजाति हैं। वे हुधयले से निकले हैं, जो हज़रत इलियास के पोते थे जिसका नाम एलिय्याह के नाम पर रखा गया था।

                                               

बरिक

बरिक Bariq: दक्षिण-पश्चिम सऊदी अरब में बरैक से एक जनजाति है। इस जनजाति में चार विभाजन होते हैं: अल-हुमायदाह, अल-मुसा इब्न अली, अल-इस्बा और अल-जिबाली। उनके घर महायाइल के 15 मील उत्तर में स्थित हैं। वे 20 मील उत्तर और दक्षिण और 30 मील पूर्व और पश्च ...

                                               

बहिरा

बहिरा, या लैटिन पश्चिम में सर्कियस मोंक, एक अश्शूर या अरब अरियन, नेस्टोरियन या संभवतः नोस्टिक नासरियन ईसाई भिक्षु था, बहिरा ने ही पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब को देख कर एक ईश्वर सन्देशवाह रूप पहचान की थी। इस्लामी शास्त्रों के अनुसार बहिरा की एक भविष ...

                                               

बानू याम

बानू याम एक बड़ी जनजाति हैं जो सऊदी अरब में नज्रान प्रांत और उस क्षेत्र के प्रमुख जनजाति के मूल निवासी हैं। वे अरबनिष्ठियों की कहतानी शाखा से संबंधित हैं, विशेष रूप से समूह बानु हमदान के नाम से जाना जाता है, और इसलिए, दक्षिण-पश्चिम अरब के मूल निव ...

                                               

मक्का की घेराबंदी (683)

सितंबर-नवंबर 683 में मक्का की घेराबंदी दूसरी इस्लामी गृह युद्ध की शुरुआती लड़ाई में से एक थी। मक्का शहर अब्दल्लाह इब्न अल-जुबैर के लिए एक अभयारण्य के रूप में कार्य करता था, जो उमय्यद यजीद प्रथम द्वारा खलीफात के राजवंश उत्तराधिकार के सबसे प्रमुख च ...

                                               

मक्का पर विजय

मक्का पर विजय अरबी: فتح مكة fatḥ makkah उस घटना को संदर्भित करती है जब 11 जनवरी, 630 ईस्वी, जूलियन, 20 रमजान, 8 एएच पर हज़रत मुहम्मद सहाब के नेतृत्व में मुस्लिमों द्वारा मक्का पर विजय प्राप्त की गई थी। हज़रत मुहम्मद सहाब ने 6 रमजान की यात्रा शुरू ...

                                               

मुदर क़बीला

मुदर या मुधर या मुज़र एक अदनानी क़बीला है। पारंपरिक रूप से इसके सदस्य अल-जज़ीरा क्षेत्र के पश्चिमी भाग में बसे हुए हैं, जिस से उस इलाक़े को दियार मुदर कहा जाता है।

                                               

मुहम्मद का वंश वृक्ष

हज़रत मुहम्मद सहाब का वंश वृक्ष: यह लेख इस्लामिक पैगंबर, हज़रत मुहम्मद सहाब के परिवार के पेड़ के बारे में है। हाशिम और कुरैशी जनजाति के परिवार के सदस्य के रूप में जाना जाता है जो अदानी है।

                                               

मुहम्मद बिन क़ासिम

मुहम्मद बिन क़ासिम इस्लाम के शुरूआती काल में उमय्यद ख़िलाफ़त का एक अरब सिपहसालार था। उसने १७ साल की उम्र में भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमी इलाक़ों पर हमला बोला और सिन्धु नदी के साथ लगे सिंध और पंजाब क्षेत्रों पर क़ब्ज़ा कर लिया। यह अभियान भारतीय उ ...

                                               

मुहर्रम का शोक

मुहर्रम का शोक शिया और सुन्नी मुसलमान दोनों से जुड़े अनुष्ठानों का एक धार्मिक कार्य है। इस्लामिक कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम में स्मारक आता है। यह आयोजन करबाला की लड़ाई की सालगिरह है, जब इमाम हुसैन इब्न अली को परिवार सहित दूसरे उमाय्याद खलीफ दु ...

                                               

रबीअह क़बीला

रबीअह एक अदनानी क़बीला था। इस क़बीले की कई शाखाएँ हैं जो मध्य पूर्व में फैली हुई हैं। सारे अदनानी अरबों की तरह इनकी मूल मातृभूमि भी हिजाज़ क्षेत्र माना जाता है।

                                               

रशीद उद-दीन हमदानी

रशीद उद-दीन, जिन्हें रशीद उद-दीन फ़ज़्ल-उल्लाह​ हमदानी भी कहते हैं, एक मध्यकालीन ईरानी चिकित्सक, गणितज्ञ और लेखक थे। उन्होंने इस्लामी इतिहास पर जामी अल-तवारीख़ नामक एक बहुत विस्तृत ग्रन्थ लिखा था। इसे विशेषकर १३वीं और १४वीं शताब्दियों के इल्ख़ानी ...

                                               

राशिदून ख़लीफ़ा

120px खलीफ़ा राशिदून: خلیفۃ راشدون - रुष्द व हिदायत पाये खलीफ़ा। मुसलमानों के लिए पैगम्बर मुहम्मद की मृत्यु के बाद, सन् ६३२ से लकर सन् ६६१ के मध्य के खलीफ़ा प्रधानों को राशिदून या अल खलीफ़ उर्र-राशिदून सही दिशा में चलते हुए कहते हैं। कार्यकाल के ...

                                               

शिमर

शिमर इब्न जिल्जुशन या शिमर बानू किलाब जनजाति से जिल्जुशन का पुत्र था, जो अरब के हौजिनिनी क़सीद जनजातियों में से एक था। हज़रत अब्बास इब्न अली की मां उम्म उल-बानिन भी बनू किलाब जनजाति से थीं। इस्लाम में शिमर की एक अत्यचारी प्रतिष्ठा है। वह याजीद प् ...

                                               

सहाबा

सहाबा या अस-सहाब इस्लाम की सर्वोच्च धार्मिक हस्ती पैग़म्बर मुहम्मद के साथियों, शिष्यों, लेखकों और परिवारजनों का नाम है जिन्होनें उनके जीवनकाल में उनका साथ दिया। अरबी भाषा में साहब का अर्थ साथी या सहयोगी होता है और इसका बहुवचन शब्द सहाबा है।

                                               

सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी

सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी या गाज़ी मियाँ अर्ध-पौराणिक ग़ज़नवी सेना का मुखिया था जिसे सुल्तान महमूद का भाँजा कहा जाता है। माना जाता है कि वह 11वीं शताब्दी की शुरुआत में भारत के विजय में अपने मामा के साथ आया था, हालांकि ग़ज़नवी इतिवृत्त में उसका उल्ले ...

                                               

हज्जाज बिन युसुफ़

अल- हज्जाज बिन युसुफ़ इस्लाम के शुरूआती काल में उमय्यद ख़िलाफ़त का एक अरब प्रशासक, रक्षामंत्री और राजनीतिज्ञ था जो इतिहास में बहुत विवादित रहा है। वह एक चतुऔर सख़्त​ शासक था, हालांकि अब कुछ इतिहासकारों का मत है कि उमय्यद ख़िलाफ़त के बाद आने वाले ...

                                               

हर्ब

हर्ब या हरब "युद्ध" अरब प्रायद्वीप में मुख्य रूप से सुन्नी जनजाति है। यह मूल रूप से एक कहतानी जनजाति है। अरब जनजातियों की वंशावली पर कई प्रामाणिक स्रोत बताते हैं कि हरब जनजाति के दादा हरब इब्न साद हैं। इब्न साद इब्न खवलान इब्न अमृत इब्न कधहा इब्न ...

                                               

हारून अल रशीद

हारुन अल रशीद ; 17 मार्च 763 या फरवरी 766 -24 मार्च 809 पांचवें अब्बासी खलीफा थे। इनकी जन्म तिथि पर विद्वानों का अलग मत है, विभिन्न स्रोत 763 से 766 की तारीख देते हैं इस्लामिक स्वर्ण युग के शिखर के दौरान अल-रशीद ने 786 से 809 तक शासन किया। इनके श ...

                                               

इस्लाम-पूर्व अरब

                                               

उमय्यद ख़िलाफ़त

                                               

कर्बला की लड़ाई

                                               

ख़लीफ़ा

                                               

ख़िलाफ़त

                                               

मुस्लिम विजय

शब्दकोश

अनुवाद
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